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Ghaziabad News: लोनी और मोदीनगर में औद्योगिक सिटी बसाने की योजना

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गाजियाबाद। सूई से लेकर हवाई जहाज तक के पार्ट बनाने वाली उद्योग नगरी के रूप में पहचान रखने वाले गाजियाबाद में उद्योगों को जमीन नहीं मिल रही है। नए उद्योगों को जमीन मिल सके इसके लिए अब शहर के सीमावर्ती क्षेत्रों में कृषि योग्य भूमि का भू-उपयोग परिवर्तन कराकर औद्योगिक टाउनशिप बसाने की योजना पर जीडीए ने काम शुरू कर दिया है। लोनी, मोदीनगर और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के किनारे बसे गांवों की जमीन पर उद्योगों को स्थापित करने की कवायद तेज हो गई है।
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महायोजना 2031 में भी भी औद्योगिक क्षेत्रों के लिए व्यवस्था की गई है। पिछली बोर्ड बैठक में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने जिले के मोदीनगर और डासना मसूरी के 61 गांवों को जीडीए में शामिल करने का प्रस्ताव रखा था, जिसे बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। जीडीए के क्षेत्र विस्तार में आए ज्यादातर गांव दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से सटे हैं। आने वाले सालों में जहां शहरों का विस्तार बढ़ेगा वहीं, उद्योगों के लिए जगह की भी जरूरत होगी। ऐसे में उद्योगों के लिए औद्योगिक टाउनशिप की योजना पर काम किया जा रहा है। ट्रांपोर्टनगर, औद्योगिक टाउनशिप के लिए डासना, मोदीनगर, लोनी को चिन्हित किया गया। इन इलाकों में कृषि योग्य जमीन के भू-उपयोग की योजना तैयार की जा रही है। लोनी में मंडोला विहार के आसपास, दिल्ली-सहारनपुर ग्रीन कॉरिडोर के आसपास भी औद्योगिक क्षेत्र बनाने की दिशा में जीडीए काम कर रहा है।
जिले में छोटे- बड़े 28 हजार उद्योग
जिले में छोटे -बड़े करीब 28 हजार उद्योग हैं। इसके साथ अलग-अलग क्षेत्रों में 15 औद्योगिक क्षेत्र हैं। दिल्ली से सटे लोनी में तो आवासीय क्षेत्रों में लोगों ने उद्योग लगा रखे हैं। इंडस्ट्री टाउनशिप बनने के बाद इन उद्योगों के साथ ही नए उद्योगों को भी जमीन मिल सकेगी।
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3700 निवेशकों ने किया है एक लाख 37 हजार करोड़ का एमओयू साइन
2023 में गाजियाबाद में उद्योग लगाने की इच्छा रखने वाले 3700 उद्यमियों ने करीब एक लाख 37 हजार करोड़ का निवेश करने का एमओयू साइन किया था। उपायुक्त उद्योग श्रीनाथ पासवान का कहना है कि जमीन नहीं मिलने से अभी तक 3300 निवेशक उद्योग नहीं लगा सके हैं। करीब साढ़े तीन सौ लोगों ने ही उद्योग लगाने का काम शुरू किया है।
जीडीए वीसी अतुल वत्स ने बताया कि शहरी की सीमाओं पर बसे क्षेत्रों में औद्योगिक टाउनशिप योजना को लाने के लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है। लोनी, मोदीनगर, मंडोला, डासना, मसूरी में कृषि योग्य भूमि के भू-उपयोग परिवर्तन के लिए शासन और प्रशासन से पत्र व्यवहार किया जा रहा है। प्रस्ताव तैयार कर बोर्ड बैठक में ले जाया जाएगा। अगले 15 वर्ष की कार्ययोजना पर काम चल रहा है।
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