राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बड़े पैमाने पर पर्यावरण उल्लंघन की विस्तृत जांच के बाद बृहस्पतिवार को निर्देश दिया कि प्रेम नगर, लोनी, गाजियाबाद में कोई भी अनधिकृत रंगाई इकाई संचालित न हो। अदालत ने यह जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) और स्थानीय अधिकारियों को सौंपी है।
यह मामला प्रेम नगर स्थित रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से दायर किया गया था। आरोप था कि कई लघु-स्तरीय कपड़ा रंगाई इकाइयां आवश्यक संचालन सहमति के बिना अवैध रूप से चल रही हैं। स्थानीय नालों में अनुपचारित रासायनिक अपशिष्ट छोड़ रही हैं। भूजल को प्रदूषित कर रही हैं। यह अपशिष्ट इंद्रपुरी नाले में बहता है, जो यमुना नदी में मिलता है।
अदालत की तरफ से गठित संयुक्त समिति ने क्षेत्र की सभी 286 औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण किया। पाया कि 50 रंगाई उद्योग चल रहे थे, जिनमें से 34 के पास वैध संचालन सहमति नहीं थी। तीन इलेक्ट्रोप्लेटिंग इकाइयां भी उसके बिना काम कर रही थीं। आर्य नगर में एक स्थान से लिए गए भूजल के नमूने अनुमेय सीमा के अनुरूप नहीं पाए गए।
किसी भी अवैध इकाई ने अपशिष्ट उपचार संयंत्र (ईटीपी) नहीं लगाए थे, जिसके कारण प्रदूषण सीधे इंद्रपुरी नाले में गिर रहे थे। यूपीपीसीबी और जिला प्रशासन ने 37 अवैध इकाइयों में से 30 की बिजली काट दी है, और शेष सात की भी जल्द ही बिजली काट दी जाएगी। एनजीटी ने यह भी कहा कि इंद्रपुरी नाले में प्रदूषण यमुना में गिरने वाले कई नालों से संबंधित एक बड़े मामले का हिस्सा है।
गाजियाबाद के जिला मजिस्ट्रेट को नाले में अनुपचारित सीवेज और औद्योगिक कचरे के प्रवाह को रोकने के लिए तीन महीने के भीतर एक समयबद्ध कार्य योजना तैयार करने और न्यायाधिकरण को एक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।