ग्राहक अब रसोई गैस सिलेंडर के बदले में हॉकर को पेटीएम से भुगतान कर सकेंगे। इंडियन ऑयल की ओर से सभी डिस्ट्रीब्यूटरों को ई-मेल भेज कर यह निर्देश दिया गया है। डिस्ट्रीब्यूटरों को कैशलेस के सभी विकल्प वोडाफोन पैसा, ई-वॉलेट दिए गए हैं लेकिन उन्हें पेटीएम सबसे आसान विकल्प दिख रहा है।
ग्राहक अन्य विकल्पों से भी भुगतान कर सकते हैं। इसके साथ ही अगर ग्राहक इन कैशलेस एप के जरिए भुगतान नहीं कर सकता है तो गैस एजेंसी में स्वैप मशीन भी उनके पास विकल्प है।नोटबंदी के बाद अब लोग कैशलेस ट्रांजेक्शन के नए-नए तरीके अपना रहे हैं।
घरेलू गैस कंपनियों ने अपने सभी डिस्ट्रीब्यूटरों को निर्देश दिया है कि वह खुद और अपने हॉकरों को कैशलेस ट्रांजेक्शन करना बताएं। इसका ये फायदा होगा कि अगर सरकार पेट्रोल पंप केबाद गैस एजेंसियों पर भी 500-1000 के पुराने नोट लेने पर पाबंदी लगाती है, फिर भी काम में कोई रुकावट नहीं आएगी।
फेडरेशन ऑफ एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष इरेश कुमार ने बताया कि कंपनी ने भविष्य को देखते हुए रणनीति बनाई गई है। इसके तहत अब कैशलेस काम होगा। हॉकर जब गैस सिलेंडर लेकर ग्राहकों के पास जाएंगे तो वह पेटीएम, ई-वॉलेट, वोडाफोन पैसा जैसे एप की सहायता से पेमेंट लेंगे।
हॉकरों को इसकी ट्रेनिंग कराई जाएगी। इसके बाद हॉकर घराें में जाएंगे और पेटीएम से कैश लेने के तरीके बताएंगे। उधर, जो ग्राहक इन एप से पेमेंट नहीं कर सकते हैं, वे गैस बुकिंग के बाद मोबाइल पर मैसेज आने पर गैस एजेंसी में जाकर डेबिट या क्रेडिट कार्ड के स्वप मशीन के जरिए भुगतान कर सकते हैं।
घर में सिलेंडर आने पर हॉकर को पेमेंट स्लिप दिखा कर सिलेंडर मिल जाएगा। पेटीएम समेत अन्य कंपनियों से बातचीत हो गई है। उम्मीद है कि मंगलवार या बुधवार तक यह व्यवस्था शुरू हो जाएगी। गाजियाबाद में करीब 10 लाख गैस उपभोक्ता हैं।
प्रतिदिन 14 से 15 हजार सिलेंडरों की खपत होती है। अगर इनमें से आधे उपभोक्ताओं ने भी कैशलेस भुगतान शुरू कर दिया तो यह क्रांति से कम नहीं।