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बाहरी क्षेत्र में बनेंगी ‘कैटल कालोनियां’

Tue, 23 Aug 2016 12:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो /गाजियाबाद
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गाय - फोटो : pti
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आवारा पशुओं को शहर से बाहर किया जाएगा। जनता को आवारा पशुओं से निजात दिलाने के लिए राज्य सरकार ने शहरी क्षेत्र के बाहरी क्षेत्रों में ‘कैटल कालोनी’ स्थापित करने का फैसला किया है।
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इसके लिए नगर निगम, विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद को तीन महीने में संयुक्त रूप से प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रस्ताव में डेयरियों को भी शहर के बाहरी क्षेत्र में स्थापित करने को कहा गया है।

दरअसल, एक जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने काफी दिन पहले प्रदेश सरकार को आवारा पशुओं को शहर से बाहर करने का निर्देश दिया था। इस आधार पर निदेशक स्थानीय निकाय के अलावा सभी कमिश्नर, डीएम, नगर आयुक्त व अधिशासी अधिकारियों को आवारा पशुओं के खिलाफ अभियान चलाने का निर्देश दिया था। अभियान चला भी, लेकिन कुछ दिन बाद ही अभियान ठप हो गया।
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बीते दिनों आवास एवं शहरी नियोजन, आवास विकास परिषद और नगर विकास विभाग के उच्चाधिकारियों की बैठक में यह मुद्दा फिर उठा था। अधिकारियों का कहना था कि जब तक इन पशुओं को रखने और डेयरियों के संचालन के लिए कोई व्यवस्थित स्थान उपलब्ध नहीं कराया जाएगा, तब तक इस समस्या का स्थायी हल नहीं किया जा सकता है।

इस आधार पर यह निर्णय लिया गया है कि तीनों विभाग मिलकर शहर के बाहर एक ऐसे स्थान का चयन करें, जहां शहरी क्षेत्र के पशुओं को शिफ्ट किया जा सके। शहरी इलाकों में चल रही अवैध डेयरियों के खिलाफ कार्रवाई के भी प्रावधान किए जाएंगे।

एक बार शहर से बाहर करने के बाद भी कोई पशु पालक शहरी क्षेत्र में फिर से डेयरी का संचालन करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

एडीएम की अध्यक्षता में बनेगी समिति
आवारा पशुओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए एडीएम (प्रशासन) की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी। यह समिति आवारा पशुओं और अवैध डेयरियों को शहर के बाहर करने के संबंध में की गई कार्रवाई से हर 15 दिन में डीएम को अवगत कराएगी। समिति में पुलिस उपाधीक्षक, नगर आयुक्त द्वारा नामित अधिकारी व पशु चिकित्साधिकारी को शामिल किया जाएगा।

‘नंदी पार्क’ की व्यवस्था बदहाल
गाजियाबाद नगर निगम ने राजनगर एक्सटेंशन रोड पर आवारा सांडों के लिए ‘नंदी पार्क’ बनाया हुआ है। इसमें करीब तीन सौ सांड़ हैं, लेकिन व्यवस्था बदहाल होने की वजह से यहां अब और सांड़ों को रख पाना मुश्किल है। इसके अलावा निगम के पास गायों, कुत्तों और बंदरों को पकड़ने का इंतजाम नहीं है। बंदरों के आतंक से लोग परेशान है।

इस मसले पर नगर निगम और वन विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ लेते हैं। वहीं प्रभावी योजना न होने की वजह से शहर में कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

अधिकारी बोले  
नगर निगम अपने स्तर पर आवारा पशुओं को पकड़ने का काम कर रहा है। शासन के आदेश अभी निगम में नहीं पहुंचे हैं। आदेश मिलने के बाद उनके मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। कैटल कालोनी बनाने के लिए प्राधिकरण से मदद ली जाएगी। - अब्दुल समद, नगर आयुक्त
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