एनजीटी के आदेश के बावजूद भी गाजियाबाद में तालाब कब्जा मुक्त नहीं हो सके। दिसंबर 2014 में एनजीटी के आदेश आने से सरकारी विभागों ने तालाबों के बदले जमीन देने की बात कही थी। लेकिन तमाम सरकारी विभागों ने ऐसा कुछ किया नहीं। अब 29 सितंबर को सुनवाई होनी है।नगर निगम क्षेत्र में 138 तालाबों पर पूरी तरह कब्जे हो चुके हैं।
इन तालाबों पर प्राइवेट लोगों ने ही नहीं सरकारी विभागों ने भी कब्जे कर रखे हैं। तालाबों की जमीन पर जीडीए ने शास्त्री नगर आवासीय योजना खड़ी कर दी, यूपीएसआईडीसी ने उद्योगों को जमीन आवंटित कर दी और आविप ने आवासीय योजना में तालाबों को पाट दिया। तालाबों की मानीटरिंग करने वाले नगर निगम का एक स्टोर भी तालाब की जमीन पर बना है।
कड़कड़ मॉडल निवासी सुशील राघव की याचिका पर एनजीटी ने सूबे के चीफ सेक्रेटरी को तालाबों को खाली कराकर हर महीने रिपोर्ट एनजीटी में दाखिल करने के आदेश दिए थे। बावजूद इसके गाजियाबाद में तालाब खाली नहीं हुए।
इन सरकारी विभागों के कब्जे में हैं तालाब
मकनपुर में पांच, सिहानी में एक और रजापुर में चार तालाबों पर जीडीए कालोनी बन गई है। इसके अलावा नासिरपुर में जीडीए कालोनी और पार्क विकसित कर दिया गया। रईसपुर में तालाब की जमीन पर जीडीए ने पानी की टंकी बना दी। जीडीए पर कुल 6.6810 हेक्टेयर तालाब की जमीन पर आबादी बस गई है।
आवास विकास परिषद ने प्रहलाद गढ़ी में पांच तालाबों की .6950 हेक्टेयर जमीन पर आवासीय योजना बना ली है। रजापुर का एक तालाब सीपीडब्ल्यूडी की बिल्डिंग में है। यह तालाब .5940 हेक्टेयर का है। यूपीएसआईडीसी की योजना में कड़कड़ मॉडल, झंडापुर, महाराजपुर के 12 तालाब शामिल हैं, जिन पर अब पूरी तरह अतिक्रमण है।
पूर्व में सभी विभागों को अतिक्रमण किए गए तालाबों के बदले जमीन देने के लिए पत्र भेजे गए थे। इसमें जीडीए ने कोयल एंक्लेव में सिर्फ एक तालाब खुदवाने की शुरुआत की है, बाकी किसी भी विभाग ने जमीन नहीं दी। - एमपी सिंह, संपत्ति अधिकारी, नगर निगम।
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ग्रामीण क्षेत्र में एसडीएम के माध्यम से तालाबों को खाली कराया गया है। निगम क्षेत्र में तालाबों की स्थिति की जानकारी कराई जाएगी। एनजीटी के आदेश के मुताबिक कार्रवाई कराई जाएगी। - निधि केसरवानी, डीएम।