एनजीटी का डीएम, नगर आयुक्त, जीडीए, एसएसपी और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड पर लगाया गया पांच लाख का जुर्माना अफसरों की टेंशन बन गया है। इस मामले में डीएम ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को फटकार लगाई है। जुर्माना लगने के बाद अब सभी विभाग मामले में एक-दूसरे के पाले में गेंद सरका रहे हैं।
डीएम विमल कुमार शर्मा ने जुर्माने की कार्रवाई के बाद एडीएम सिटी प्रीति जायसवाल को तलब कर पूछा कि आखिर इस केस में पांच लाख का जुर्माना कैसे लग गया। समय रहते क्यों नहीं एक्शन लिया गया।
इस पर एडीएम सिटी का कहना था कि पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारियों को कई बार रिमाइंडर भेजा गया था, मगर कोई कार्रवाई करने पहुंचता ही नहीं था। डीएम ने एडीएम से सभी विभागों के प्रमुख अधिकारियों की बैठक बुलाने को कहा।
अधिकारियों की टेंशन का एक कारण यह भी है कि आखिर जुर्माने की यह रकम किस मद से दी जाएगी। इसके लिए अधिकारी अब कानूनविदों से सलाह कर रहे हैं। बता दें कि तीन दिन पूर्व महाराजपुर बॉर्डर पर कौशांबी डिपो के सामने चलने वाले अवैध बस अड्डे से हो रहे पॉल्यूशन के चलते एनजीटी ने जीडीए, डीएम, एसएसपी, नगर निगम और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को फटकार लगाते हुए पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। टीएचए की कारवा संस्था ने इस मामले में एनजीटी में एक याचिका दाखिल की थी।