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चुनावी घमासान में जनता का मिज़ाज समझना नहीं आसान

Tue, 07 Feb 2017 10:43 PM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
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ईवीएम - फोटो : File Photo
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विधानसभा चुनावों के पहले चरण में पश्चिमांचल में 11 फरवरी को मतदान है, जिसे लेकर सभी राजनीतिक  दलों ने अपनी प्रतिष्ठा को दांव पर लगा दी है। गाजियाबाद से लेकर बुलंदशहर तक जिस तरह 19 जनवरी से आठ फरवरी तक एक दर्जन से ज्यादा बड़े नेताओं ने यहां रैलियां कीं, उससे साफ है

कि यहां की 73 सीटें किसी भी राजनीतिक दल के सियासी समीकरण को बना और बिगाड़ सकती हैं। यही वजह है कि अब जब प्रचार खत्म होने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है, सभी दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इनमें मंगलवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की गढ़ की सभा हो या गाजियाबाद में मायावती की।
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इसी कड़ी में बुधवार को आ रहे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल। सबका एक ही सपना और एजेंडा है- जिसका पश्चिम, उसका राज।इसे सियासी जरूरत या मजबूरी ही कहिए कि विकास की बात करने वाले प्रधानमंत्री की टीम पूरे समय यहां वोटरों को पोलराइज करने में जुटी रही।

इसके लिए महंत आदित्य नाथ, रविशंकर प्रसाद, उमा भारती, संजीव बालियान, हेमा मालिनी, राजनाथ सिंह तक का दौरा हो चुका है। बुधवार को प्रधानमंत्री अंतिम दौर में चुनावी प्रचार को धार देंगे।

इसी तरह समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का संयुक्त गठबंधन चुनाव में कितना कमाल दिखा पाएगा, ये तो आने वाला समय बताएगा, लेकिन जिस तरह से घर की तमाम चुनौतियों के बीच मुख्यमंत्री ने विकास का नारा और अल्पसंख्यकों को रिझाने के लिए भाजपा की कट्टर छवि का हवाला दिया, उसे आजम खान और गुलाम नबी आजाद ने आगे बढ़ाया।
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इतना ही नहीं नगमा ने केंद्र पर महिलाओं की अनदेखी करने का आरोप लगा खूब खरीखोटी सुनाई। बसपा से पूरे चुनाव की कमांड मायावती ने संभाली और तीन तलाक से लेकर कॉमन सिविल कोड तक के मसले को मुद्दा बना दिया    
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