पार्किंग में होने वाले धांधली को रोकने के लिए नगर निगम ने नई शर्तें लागू कर दी हैं। इन शर्तों के मुताबिक इस बार पार्किंग की रसीदें खुद नगर निगम छपवा कर देगा और रसीद पर अधिकारी के हस्ताक्षर के साथ ही पार्किंग शुल्क भी अंकित होगा।
ऐसे में पार्किंग में वाहन चालकों से तय कीमतों से ज्यादा की वसूली नहीं हो सकेगी। वहीं, नगर निगम ने वाहन चालकों को राहत देते हुए इस बार पार्किंग शुल्क में भी कोई बढ़ोतरी नहीं की है।
मेयर अशु वर्मा ने बताया कि अकसर शिकायत मिल रही थी कि ठेका मिलने के बाद ठेकेदार तय पार्किंग शुल्क से ज्यादा वसूलते हैं। इस बार ऐसा नहीं होगा। उन्होंने बताया कि इस बार टेंडर प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है।
टेंडर फार्म के साथ ठेकेदार को बेस प्राइस का 25 प्रतिशत सिक्योरिटी मनी के रूप में जमा कराना होगा और ठेका मिलने के बाद ठेकेदार को एक साथ पूरी रकम सात दिन के अंदर जमा करानी होगी। इस बार पार्किंग ठेके की धनराशि में पिछले वर्ष के मुकाबले 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।
हालांकि वाहन चालकों की जेब पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि पार्किंग का किराया पिछले वर्ष के बराबर ही रखा गया है। मेयर अशु वर्मा ने बताया कि पार्किंग के ठेकों में पूरी पारदर्शिता अपनाई जाएगी। बुधवार को सील बंद टेंडर लिए जाएंगे जो 7 अप्रैल को अधिकारियों व ठेकेदारों के सामने खोले जाएंगे।
पार्किंग शुल्क तय
नगर निगम ने पिछले वर्ष का ही पार्किंग शुल्क लागू किया है। यानी कार, टैंपो व थ्री व्हीलर के लिए 20 रुपये, स्कूल व मोटरसाइकिल के लिए 10 रुपये और साइकिल का 5 रुपये लिया जाएगा।
यह दरें 12 घंटे के लिए होंगी। निर्धारित समय के बाद भी इतनी ही धनराशि ली जाएगी। ठेकेदार पार्किंग स्थल पर एक बोर्ड भी लगाएंगे, जिस पर पार्किंग शुल्क की दरें अंकित होंगी और ठेकेदार के कर्मचारी आई कार्ड लगाएंगे।