गाजियाबाद। अब हर दो साल बाद शहर के लोगों की जेब पर टैक्स का बोझ बढ़ेगा। शासन ने नगर निगमों की इनकम बढ़ाने के लिए प्रत्येक दो साल में संपत्ति कर (हाउस, सीवर और वाटर टैक्स) की दरें बढ़ाने के आदेश दिए हैं। इसे सख्ती से लागू करने के लिए कहा गया है।
ऐसे में अब प्रत्येक दो साल में भवन मालिकों को बढ़ा हुआ टैक्स अदा करना होगा। हालांकि नगर निगम अधिनियम- 1959 में भी प्रत्येक दो साल में संपत्ति कर रिवाइज करने का प्रावधान है, लेकिन अधिकांश नगर निगमों में पांच-छह साल तक हाउस टैक्स नहीं बढ़ा है।
नगर निगम ने भी करीब 12 साल बाद वर्ष 2015 में हाउस टैक्स की दरें रिवाइज की थीं। जबकि आबादी बढ़ने से नगर निगमों पर खर्च का दबाव लगातार बढ़ रहा है। अब नगर विकास विभाग के विशेष सचिव रमाकांत पांडेय की ओर से सभी नगर निगमों को आदेश जारी कर प्रत्येक दो साल में हाउस टैक्स बढ़ाने को कहा है। उन्होंने कहा कि नगर निगमों की इनकम बढ़ाने के लिए इस आदेश को सख्ती से लागू किए जाएं।
चुनावी साल में टैक्स नहीं बढ़ाएगा निगम
शासन ने आदेश भले जारी कर दिए हो, लेकिन गाजियाबाद के लोगों पर इस बाद संपत्ति टैक्स बढ़ने का बोझ नहीं पड़ेगा। गाजियाबाद नगर निगम चुनावी साल में इस बार टैक्स नहीं बढ़ाएगा। निगम ने दो साल पहले ही हाउस टैक्स की दरों में 10 फीसदी की बढ़ोतरी की थी।
इसके अगले साल यानी वर्ष 2016-17 में भी टैक्स की दर 5 फीसदी बढ़ाई थी। हालांकि इसका विरोध भी हुआ, लेकिन पार्षदों के विरोध के बावजूद टैक्स में वृद्धि की गई। ऐसे में इस बार लगातार तीसरे साल हाउस टैक्स नहीं बढ़ाया जाएगा। चुनावी साल होने की वजह से महापौर और पार्षद भी टैक्स बढ़ोतरी के मूड में नहीं है, लेकिन अगले साल संपत्ति कर की दरों में बढ़ोतरी होना तय है।