इस बार की शिवरात्रि को अति विशिष्ट है। नक्षत्रों और दिन के संयोग की वजह से सावन की शिवरात्रि मनोवांछित फल देने वाली है। एक तो सावन का सोमवार और उसी दिन शिवरात्रि, यह विशिष्ट योग बन रहा है। पंडित सुरेंद्र शुक्ल ने बताया कि इस तरह के विशिष्ट योग में पड़ने वाली शिवरात्रि को महामहा शिवरात्रि कहते हैं। इस शिवरात्रि पर भगवान शिव की अर्चना अधिक फलदायी होगी। इस नक्षत्र में जिस मनोकामना को लेकर रुद्राभिषेक करेंगे, वह अवश्य ही पूर्ण होगी। इस शिवरात्रि मनोयोग से पूजा करने से शिव की विशेष कृपा प्राप्त होगी।
दूधेश्वरनाथ मंदिर में शुरू हुई तैयारी: कांवड़ की तैयारियां दूधेश्वरनाथ मंदिर में शुरू हो गई है। मंदिर में साफ-सफाई के साथ लाइटिंग आदि की व्यवस्था शुरू हो गई है। मंदिर के मीडिया प्रभारी ने बताया कि सोमवार को शिवरात्रि होने के कारण इस बार कांवड़ियों की संख्या भी अधिक होगी। इससे पहले 2013 में सोमवार के दिन शिवरात्रि का संयोग बना था। मंदिर में हर साल चार से पांच लाख तक कांवड़िए आते हैं।
ग्रह विशेष से पीड़ित व्यक्ति निम्न चीजों से शिव का रुद्राभिषेक करें इससे भक्तों को मनोवांछित फल प्राप्त होगा।
ग्रह
सूर्य गाजर का रस
चंद्रमा गाय का दूध
मंगल अनंत मूल की जड़ को जल में भिगोकर
बुध गन्ने का रस
बृहस्पति दूध में केसर मिलाकर
शुक्र पंचामृत
शनि सरसों का तेल
राहु-केतु पंचामृत