शासन ने वसुंधरा के सेक्टर 7 और 8 की 102 एकड़ जमीन को मिश्रित भू उपयोग (मिक्सड लैंड यूज) में परिवर्तित कर दिया है। शासन के इस आदेश से वसुंधरा के लोग निराश हैं क्योंकि यह जमीन सामुदायिक सुविधाओं के लिए थी। हालांकि शासन ने आवास विकास परिषद को आदेश दिया है कि बढ़ती आबादी को देखते हुए इस जमीन पर सामुदायिक सुविधाओं का भी ख्याल रखा जाए।
आवास विकास परिषद की तरफ से वसुंधरावासियों को वर्षों से खाली पड़ी इस जमीन के बारे में यही सपना दिखाया गया था कि इस पर सामुदायिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मसलन-स्कूल, अस्पताल, स्पोर्ट्स स्टेडियम, सामुदायिक केंद्र, डिग्री कॉलेज आदि। यह सपना टूट गया। अब इस भू उपयोग परिवर्तन के बाद मुख्य रूप से यहां मकान और दुकान होंगे। मल्टीप्लेक्स बिल्डिंग या हाईराइज टावर और मॉल्स होंगे। इससे परिषद को करोड़ों का फायदा होगा।
इस जमीन के भू उपयोग परिवर्तन को लेकर लंबे समय से परिषद प्रयासरत था। पिछले साल परिषद ने इस परिवर्तन का अनुरोध जीडीए से किया था। इस पर जीडीए ने पिछले साल 25 अक्टूबर को लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे थे। बड़ी संख्या में आपत्तियां आई थीं। शासन की तरफ से बनाई गई एक कमेटी ने इस साल 29 फरवरी को इस पर सुनवाई की थी।
इसके बाद 19 अप्रैल को जीडीए बोर्ड बैठक में इसके भू उपयोग परिवर्तन का प्रस्ताव पास कर दिया था और अनुमति के लिए शासन को भेज दिया था। शासन से अनुमति संबंधी पत्र बुधवार को जीडीए पहुंचा। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के सचिव पंधारी यादव द्वारा जारी पत्र में लिखा गया है कि बढ़ती आबादी को देखते हुए भविष्य में परिषद इस जगह पर आवश्यक सामुदायिक सुविधाओं को भी विकसित करे।
स्कूल, कॉलेज, अस्पताल से वंचित रह जाएगा वसुंधरा
आवास विकास परिषद ने इस जमीन पर स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, स्टेडियम आदि बनाने की प्लानिंग की थी। अब इन सुविधाओं से वसुंधरा वंचित रह जाएगा। सूत्रों की मानें तो परिषद के कुछ अधिकारी निजी बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के लिए लैंड यूज बदलने के लिए प्रयासरत थे। वसुंधरा में कहीं भी इतनी बड़ी जमीन नहीं बची है जहां बिल्डर हाईराइज टावर बना सकें। माना जा रहा है कि अब बिल्डर अपने प्रोजेक्ट लेकर यहां आएंगे।
मेट्रो के लिए पैसे देने की भी थी बात
सूत्रों ने बताया कि परिषद के कुछ अधिकारियों ने जीडीए को यह लोभ दिया था कि लैंड यूज बदलने के बाद वे मेट्रो प्रोजेक्ट में अपने हिस्से की रकम समय से चुका देंगे। चूंकि इस जमीन पर प्लॉट काटने से परिषद को खासा फायदा होगा और इस तरह वे मेट्रो को रकम दे पाएंगे। इस प्रोजेक्ट में परिषद को अपने हिस्से का साढे़ तीन सौ करोड़ देना है, जिसमें से उसने मात्र 90 करोड़ दिया है।
हुआ था खासा विरोध
लैंडयूज बदलने के प्रयास की भनक जब लोगों को लगी थी तब वसुंधरा के सभी आरडब्ल्यूए ने एकजुट होकर अटल चौक पर धरना दिया था। धरने में विधायक अमरपाल शर्मा और पूर्व विधायक सुनील शर्मा भी साथ खडे़ दिखे थे। लोगों ने चेतावनी दी थी कि अगर जमीन का लैंड यूज बदलने की कोशिश की गई तो वे परिषद कार्यालय में ताला लगाकर आंदोलन करेंगे। ऐसे में यह मामला फिर तूल पकड़ सकता है।