कुशाग्र मिश्रा
गाजियाबाद। बसपा सुप्रीमो मायावती ने गाजियाबाद में मंगलवार को अपना चुनावी इक्का चल दिया । तीन तलाक और कॉमन सिविल कोड के बहाने मायावती ने मुस्लिम समाज की दुखती रग पर हाथ रखा और इसी बहाने मुसलमानों को लुभाने की भरपूर कोशिश की।
मायावती ने ठेठ तीखे अंदाज में बसपा का पक्ष रख अल्पसंख्यक वोटरों को रिझाने की कोशिश की। पिछले दिनों भाजपा के बड़े नेता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस मसले पर चुनावी बयान देकर मुसलमान वोट बैंक में सेंध लगाने का सियासी दॉव चला था जिसके जवाब में गाजियाबाद की चुनावी सभा में मायावती अपने बयान से भाजपा की इस सेंध पर पैच लगाने की भरकस प्रयास करती दिखी।
मायावती ने ऐलानिया तीन तलाक की वकालत की। साथ ही कॉमन सिविल कोड की मुखालफत भी कर दी। इसके साथ ही वो एक बार फिर प्रचार के आखिरी दौर में मुस्लिम वोटरों को साधती दिखीं। इसके लिए उन्होंने समाजवादी पार्टी की भीतरी कलह का हवाला देकर खिसके मुस्लिम वोटरों को भी लुभाने की कोशिश की ।
तीन तलाक के मसले पर जहां भाजपा इसे खत्म करने के लिए आगे बढ़ रही है, वहीं मायावती ने चुनावी सभा में तीन तलाक का समर्थन किया। इतना ही नहीं बहनजी ने कॉमन सिविल कोड को भी ठेंगा दिखा दिया। उनका कहना था कि बसपा इससे इत्तेफाक नहीं रखती है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मसले पर मुस्लिम समाज के साथ छलावा कर रहे हैं।बीजेपी से मुसलमानों को सहानुभूतिऔर हमदर्दी नहीं चाहिए। आज मुसलमानों की बात करने वाली भाजपा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी से अल्पसंख्यक का दर्जा छीन लेना चाहती है।
आतंकवाद के नाम पर मुस्लिमों को संदेह की नजर से देखा जा रहा है। यूपी में आरएसएस के एजेंडे के तहत संप्रदायिकता फैलाई जा रही है ।भाजपा के राज में सच्चर कमेटी की सिफारिशें कभी लागू नहीं हो सकती हैं। इसलिए सुरक्षा और न्याय के राज के लिए मुसलमानों को अपने वोटों को बटंने से रोकना होगा।