जानकारी के अनुसार दोनों की मुलाकात एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी के दौरान हुई थी। धीरे-धीरे यह मुलाकात प्रेम में बदली और वर्ष 2018 में परिवार की सहमति से दोनों ने विवाह कर लिया। शादी के कुछ दिन बाद रिश्तों में तनाव बढ़ने लगा। पति का आरोप है कि पत्नी अन्य युवकों के संपर्क में है, इससे वैवाहिक जीवन प्रभावित हुआ है। वहीं, पत्नी का कहना है कि पति उस पर बेवजह शक करता है और मानसिक रूप से प्रताड़ित करता है।
इन आरोपों के चलते दोनों के बीच दूरी बढ़ती गई और एक वर्ष से दोनों अलग रह रहे हैं। महिला ने पति के खिलाफ उत्पीड़न का मामला भी दर्ज कराया है। वर्तमान में यह मामला मध्यस्थता केंद्र में विचाराधीन है, जहां दोनों पक्षों की काउंसलिंग कराई जा रही है। हालांकि हाल की में हुई बैठक में पति ने स्पष्ट कर दिया कि वह पत्नी को साथ नहीं रखना चाहता। इसके बाद पत्नी ने गुजारा भत्ता के रूप में एक करोड़ रुपये की राशि मांग ली है।
संवाद की कमी से बढ़ रहा अविश्वास
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में संवाद की कमी और आपसी अविश्वास संबंधों को कमजोर कर देता है। एमएमजी अस्पताल की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ चंदा यादव का कहना है कि समय रहते आपसी बातचीत और पेशेवर काउंसलिंग से कई रिश्तों को टूटने से बचाया जा सकता है, लेकिन जब विवाद लंबा खिंच जाता है तो समाधान कठिन हो जाता है।