कौशांबी। महाकुंभ से लौटकर आने वाले श्रद्धालुओं ने उन समस्याओं को बताया जिनसे वह जूझकर वापस घर लौटे। इनमें दोगुनी कीमत का भुगतान करने से लेकर बसों और सवारी वाहनों की मौजूदगी का न होना व घाट पर पहुंचने के लिए 10-10 किमी पहले ही सवारी वाहनों से उतार दिया जाना शामिल है।
सुविधाओं के लिए देनी पड़ रही है दुगनी कीमत
कौशांबी डिपो पर महाकुंंभ से वापस लौटकर आने वाले श्रद्धालु सचिन ने बताया कि उन्हें सुविधाओं के लिए दुगनी कीमत देनी पड़ रही है। उनका कहना था कि बाहर से आने वाले लोगों को न सिर्फ अधिक दाम चुकाने पड़ रहे हैं, बल्कि नाव का किराया भी जो पहले 800 रुपये हुआ करता था वो भी अब 2000-4000 रुपये तक हो चुका है। उन्होंने कहा कि वापस लौटने से लेकर जाने तक कोई भी सही तरह से गाइड करने वाला नहीं मिला। इसके चलते उन्हें वापस आने के लिए भी तीन-तीन बसों को अलग-अलग बस अड्डे से बदलना पड़ा। इतना ही नहीं वाहन चालक एक किमी बताकर पांच से 10 किमी पीछे तक छोड़ रहे हैं।
न चेंजिंग रूम, शौचालय भी बदहाल
श्रद्धालु पिंकी ने बताया कि महिलाओं के लिए बनाए गए चेंजिंग रूम और शौचालयों के हाल बदहाल हैं। शटल सेवा का न तो कोई समय है और न ही कोई बताने या जानकारी देने वाला। इसकी वजह से लोगों को वहां के तीन-तीन गुना दाम देकर स्थानीय चालकों की मदद से घाट तक पहुंचना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि उन्हें आठ से दस घंटे तो सिर्फ यही पता करने में निकल गए कि आखिर उन्हें स्नान घाट तक पहुंचना कैसे है।
सुविधाएं देना प्रशासन की जिम्मेदारी
महाकुंभ से वापस आईं पारुल बताती हैं कि वाहन चालकों की मनमानी बहुत बड़ी समस्या है। वे एक किमी बताकर पांच किमी पीछे तक छोड़ देते हैं। इससे श्रद्धालुओं को बहुत परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए प्रशासन को तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। श्रद्धालुओं को सुविधाएं प्रदान करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। प्रशासन को वाहन चालकों की मनमानी पर रोक लगानी चाहिए और श्रद्धालुओं को सुविधाएं प्रदान करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
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महाकुंभ से त्रिवेणी संगम में स्नान करके वापस लौटे यात्रियों ने अपने अनुभव सांझा किए। संवाद
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