गर्मियों की छुट्टी में मेड के छुट्टी पर चले जाने से ‘मेम साहब’ बहुत परेशान हैं। टीएचए की ज्यादातर सोसायटीज में काम करने वाली मेड गर्मियों की छुट्टी लेकर अपने गांव चली गईं हैं। मगर बच्चों के स्कूल की छुट्टियां शुरू हो गई हैं और मेहमान भी आने वाले हैं, ऐसे में घरवालियों की परेशानी बढ़ने वाली है।
महिलाओं का कहना है कि मेड 15 दिन की छुट्टी लेकर जाती हैं, लेकिन दो माह बाद ही लौटती हैं। उनका कहना है कि स्कूलों की छुट्टी हो गई है। गर्मी की छुट्टी में बहुत से रिश्तेदार भी उनके घर आएंगे, ऐसे में अचानक ही काम वाली जरूरी काम बता कर छुट्टी पर चली गईं। अब समस्या यह है कि घर का सारा काम कैसे होगा।
हालांकि कुछ लोगों ने तो रिश्तेदारों से कहा है कि वह अपनी कामवाली को भी घुमाने के लिए साथ ले आएं। जिन इक्का दुक्का पड़ोसियों की कामवाली छुट्टी पर नहीं गईं हैं, उनकी पूछ बढ़ गई है। पड़ोसियों से सिफारिश लगाई जा रही है।
खेती को जाती हैं लंबी छुट्टी पर
टीएचए की सोसायटीज में काम करने वाली ज्यादातर नौकरानियां बिहार की रहने वाली हैं। मई से जुलाई तक वहां खेती का काम होता है, इसलिए मेड हर वर्ष छुट्टी लेकर गांव चली जाती हैं।
15 दिन की छुट्टी लेकर जाती हैं और दो माह में लौटती हैं। ऐसे में बच्चे, मेहमान और ऑफिस एक साथ संभालना मुश्किल हो रहा है। - लक्ष्मी त्यागी, वसुंधरा सेक्टर-4
पड़ोसी की मेड भी काम करने से साफ मना कर देती है। ऐसे में घर का सारा काम खुद ही करना पड़ रहा है। - मनीषा दीक्षित, शालीमार गार्डन
कामवालियां हर बार ऐसा ही करती हैं। जरूरी है मेड के लिए भी नियम बनाए जाएं, जिसे हर आरडब्ल्यूए लागू कराए। - रश्मि शर्मा, साहिबाबाद