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लखनऊ से जुड़े फर्जी फर्म के तार, फाइलों में दब गई जांच

Sat, 02 Apr 2016 12:57 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
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नगर - फोटो : अमर उजाला
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नगर निगम के प्रकाश विभाग में फर्जी फर्म को किए गए करोड़ों रुपये के भुगतान का मामला दबने लगा है। फर्म के तार लखनऊ से जुड़े हैं, लिहाजा बोर्ड बैठक में जोर-शोर से उठे इस प्रकरण की जांच फाइल में दब गई है।
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फर्जी पते और फर्जी टिन नंबर वाली इस फर्म से संबंधित दस्तावेज निगम अफसरों को सौंपे जाने के बावजूद 14 दिन बाद भी फर्म की जांच शुरू नहीं की गई। इस मामले को उठाने वाले कांग्रेसी पार्षद अजय शर्मा ने महापौर और निगम अफसरों पर मामला दबाने का आरोप लगाया है।


पार्षद अजय शर्मा के मुताबिक नगर निगम के प्रकाश विभाग में लाइटों और उपकरणों को सप्लाई करने वाली इस फर्म का निगम में भी पंजीकरण नहीं है। फर्म को जो पता दर्शाया गया है, जांच में वह भी फर्जी मिला।
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वाणिज्य कर में फर्म का पंजीकरण दर्शाकर टिन नंबर भी दस्तावेजों पर डाला गया। पार्षद का कहना है कि तस्दीक किए जाने पर यह टिन नंबर भी फर्जी निकला। बावजूद इसके इस फर्म को निगम अधिकारियों ने करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया। इस फर्म ने नामचीन कंपनियों के नाम वाली नकली लाइटें और उपकरण नगर निगम में सप्लाई किए थे।


निगम अधिकारी नहीं डाल सकते फर्म पर हाथ
आरोप लगाने वाले पार्षद का कहना है कि यह फर्म लखनऊ में बैठे एक कद्दावर नेता के करीबी की फर्म है। निगम अधिकारी इस फर्म पर हाथ डालने से कतरा रहे हैं।
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निगम बोर्ड बैठक को 14 दिन बीतने के बावजूद महापौर ने पार्षदों की कमेटी गठित करने और जांच कराने के आदेश जारी नहीं किए। महापौर की कथनी और करनी में बड़ा अंतर दिखाई है। मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। - अजय शर्मा, शिकायतकर्ता पार्षद
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जांच को दबाया नहीं जा रहा। बोर्ड बैठक की मिनिट्स बृहस्पतिवार को ही जारी हुई है। शनिवार को पार्षदों की कमेटी तय कर जांच शुरू कराई जाएगी। घोटाला मिला तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी। - अशु वर्मा, महापौर
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