गाजियाबाद। प्रदेश के कई राज्यों में मोबाइल टॉवर से आरआर यूनिट और इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस चुराकर विदेशों को बेचने वाले जावेद मीरापुरिया की गिरफ्तारी को कमिश्नरेट पुलिस ने लुकआउट सर्कुलर जारी किया है। पुलिस का दावा है कि दुबई में बैठकर 50 से अधिक सदस्यों वाले गिरोह को चलाने वाला जावेद जल्द पुलिस की गिरफ्त में होगा। इस गिरोह के वांछित सदस्यों की गिरफ्तारी को टीम ने मुंबई में डेरा डाल रखा है।
मुजफ्फरनगर के मीरापुर गांव के रहने वाला जावेद मोबाइल टॉवर की कीमती डिवाइस चुराकर विदेशों में मोटी रकम में बेचता है। पिछले चार वर्षों में जावेद मीरापुरिया ने 50 से अधिक सदस्यों का गिरोह बना लिया है। यह गिरोह गाजियाबाद, दिल्ली एनसीआर क्षेत्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, बिहार, असम, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब और मध्यप्रदेश में विभिन्न कंपनियों के मोबाइल टॉवर से कीमती रेडियो रिसीवर यूनिट (आरआरयू), बेसबैंड यूनिट (बीबीयू), बैट्री और अन्य इलेक्ट्रिक सामान चोरीकर विदेशों में तस्करी कर मोटी रकम में बेचता है। 15 दिन पूर्व क्राइम ब्रांच टीम ने गिरोह के सक्रिय सदस्य और 25 हजार रुपये के इनामी राहुल कुमार (26) निवासी ग्राम सुहाना थाना निवाड़ी को जोधपुर राजस्थान से गिरफ्तार किया था। इसी गिरोह का मेहराजुद्दीन निवासी तुगलकाबाद एक्सटेंशन को भी क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था। मेहराजुद्दीन के कब्जे से टीम को एक दर्जन से अधिक बैंक खातों की डिटेल मिली। इन बैंक खातों में 250 करोड़ रुपये विदेशों से ट्रांसफर होने की अहम जानकारी टीम को मिली थी। पुलिस का अनुमान है कि इस गिरोह ने कई राज्यों में 500 करोड़ रुपये की कीमती इलेक्ट्रिक डिवाइस विदेशों में तस्करी की है। अलग-अलग राज्यों से मोबाइल टॉवर डिवाइस चोरी कर मुंबई बंदरगाह के रास्ते यह गिरोह आरआर और बीबी यूनिट की तस्करी करता है। गिरफ्तार सदस्यों से हुई पूछताछ में गिरोह की दिल्ली और मुंबई की ट्रेवल्स एजेंसियों से भी साठगांठ उजागर हुई है।
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विभिन्न राज्यों में दर्ज हैं मुकदमे
जावेद मीरापुरिया और उसके गिरोह के खिलाफ अलग-अलग राज्यों में सैकड़ों मुकदमे दर्ज हैं। कमिश्नरेट पुलिस ने करीब डेढ़ वर्ष पूर्व जावेद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जमानत पाकर जावेद दुबई भाग गया और वहीं से गिरोह को संचालित करता है। कमिश्नरेट पुलिस ने इस गिरोह का अस्तित्व मिटाने के लिए गिरोहबंद जावेद के भाई वसीम के साथ-साथ इस गिरोह के 46 सदस्यों को गिरफ्तार कर करोड़ों के मोबाइल उपकरण बरामद कर चुकी है। कमिश्नरेट पुलिस का अगला टारगेट जावेद मीरापुरिया के साथ-साथ उसके एक दर्जन सदस्यों को गिरफ्तार करने का है। इसके लिए क्राइम ब्रांच की टीम ने मुंबई में डेरा डाल रखा है।
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ये है लुकआउट सर्कुलर
जिस आरोपी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) जारी होता है, उसका सत्यापन स्थानीय पुलिस करती है। वांछित के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सीमाओं जैसे हवाई अड्डों या समुद्री बंदरगाहों पर जांच की जाती है। उसकी यात्रा पर रोक लगाकर एलओसी जारी करने वाली पुलिस को उसकी रिपोर्ट सौंपी जाती है। वांछित की गिरफ्तारी के लिए दोनों देशों की पुलिस आपसी सहयोग करती है।
वर्जन
दुबई में छिपे इनामी जावेद मीरापुरिया की गिरफ्तारी को लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया है। ताकि इसकी गिरफ्तारी जल्द से जल्द सुनिश्चित हो सके। हमारी टीमों ने इस गिरोह के 46 सदस्यों को गिरफ्तार जेल भेजा है। अन्य राज्यों की सापेक्ष इस गिरोह का अस्तित्व खत्म करने में हमारी टीमों को सर्वाधिक कामयाबी मिली है।
-अजय कुमार मिश्र, पुलिस आयुक्त।