एक ओर जहां मौजूदा मौसम में उल्टी-दस्त, डायरिया और पेट के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। वहीं, एमएमजी अस्पताल में दवाएं खत्म हैं। डायरिया की दवा मेट्रोजिल पिछले कई महीनों से नहीं है, जिसे नोएडा स्थित स्वास्थ्य विभाग से उधार लिया गया है।
सरकारी अस्पतालों में दवाओं की किल्लत की स्थिति छह महीने बाद भी नहीं सुधारी है। हालांकि कुछ दवाएं शासन ने उपलब्ध कराई हैं, जिनमें एंटीबायोटिक से लेकर बच्चों की बीमारी में काम आने वाले सिरप आदि शामिल हैं। इन सब के बावजूद बीते चार महीने से अस्पताल में मेट्रोजिल खत्म है।
एमएमजी अस्पताल के सीएमएस डा. जेके त्यागी ने बताया कि अस्पताल में कई दवाएं आ गई हैं, जिन दवाओं की कमी है, उसकी डिमांड शासन को भेजी गई है।
रोज साढ़े तीन हजार मरीज ओपीडी में आ रहे
दोनों सरकारी अस्पतालों में रोज करीब 3500 हजार मरीज आ रहे हैं, जिसमें पचास फीसदी मरीज उल्टी-दस्त और पेट की समस्याओं के हैं। ऐसे में दवाओं की खपत अधिक हो रही है। संयुक्त अस्पताल में जहां सामान्य दिनों में 900 से लेकर 1000 मरीज आते हैं, वही अब यह संख्या बढ़कर 1200 तक पहुंच गई है। एमएमजी अस्पताल में 1500 मरीजों के मुकाबले अब करीब 1700 मरीज आ रहे हैं।
अभी तक नहीं आए एंटी रेबीज इंजेक्शन
पिछले चार महीने से जनपद में एंटी रेबीज के इंजेक्शन का टोटा चल रहा है। किसी भी सरकारी अस्पताल में अभी तक एंटी रेबीज के इंजेक्शन नहीं आए हैं। एमएमजी अस्पताल में 15 दिन पहले स्टॉक खत्म होने के बाद भी इंजेक्शन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।