गाजियाबाद। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में वादकारियों को करीब साढ़े तीन हजार मुकदमों में केवल तारीख ही मिल रही है। अधिवक्ताओं का कहना है कि आयोग में पूर्णकालिक अध्यक्ष नियुक्त न होने के कारण ऐसा हो रहा है। चूंकि उन पर दो जनपदों का कार्यभार है और वह पर्याप्त समय गाजियाबाद में नहीं दे पा रहे हैं। इसलिए जनपद में आयोग के अध्यक्ष की पूर्णकालिक तैनाती की मांग उठाई है।
अधिवक्ता विक्रांत शर्मा का कहना है कि करीब चार महीने पहले गौतमबुद्धनगर के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर को गाजियाबाद की भी जिम्मेदारी मिली थी। वह महीने में 15 दिन गाजियाबाद में बैठते हैं, लेकिन कई बार गौतमबुद्धनगर में वादों की गंभीरता को देखते हुए वहां पर ज्यादा समय देना पड़ता है। कम समय गाजियाबाद में देने की वजह से वादों में उपभोक्ताओं को अकसर तारीख ही मिल रही हैं। इससे उपभोक्ताओं को न्याय मिलने में देरी हो रही है। अधिवक्ता विष्णु कुमार गुप्ता का कहना है कि गाजियाबाद में रोजाना चार से पांच वाद दायर किए जा रहे हैं और महीने में इनकी 100 तक पहुंच रही हैं। इसलिए गाजियाबाद में अलग से एक अध्यक्ष की व्यवस्था होनी चाहिए। अगस्त में केवल दो-तीन वाद में ही फैसला सुनाया जा सका है। उन्होंने सोमवार को 74 केस लगे, लेकिन ज्यादातर में एक महीने बाद की तो कुछ में चार महीने बाद की तारीख दी है।