रेजिडेंट्स की पीआईएल पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अधिकारियों को आड़े हाथों लिया।
कौशांबी में वायु और ध्वनि प्रदूषण के मानक लिमिट से कई गुना अधिक पाए गए हैं। कौशांबी में बढ़ते प्रदूषण के लिए जमीनी स्तर पर काम न होने पर एनजीटी ने नाराजगी व्यक्त की।
सीपीसीबी ने एनजीटी में पेश अपनी 18 पेज की रिपोर्ट में कौशांबी में वायु और ध्वनि प्रदूषण के कारणों के बारे में जानकारी दी। जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने रिपोर्ट देखने के बाद डीएम, एसएसपी, जीडीए वीसी, नगर आयुक्त, यूपी रोडवेज के अधिकारियों को फटकार लगाई।
इसके साथ ही उन्होंने डीएम को निर्देश दिया कि वह यूपी और दिल्ली की डीसीपी और निगम के अधिकारियों के साथ बैठक करें और समस्या के समाधान का हल खोजें। उसकी रिपोर्ट दो सप्ताह में एनजीटी को सौंपी जाए। अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 मई को होगी।
ध्वनि व वायु प्रदूषण के कारण
एनजीटी ने अपने पिछले आदेश में वर्किंग डे और एक नॉन वर्किंग डे का डेटा लेकर उसकी रिपोर्ट देने के लिए कहा था। आदेश पर क्षेत्र में मशीनें लगाकर डेटा कलेक्ट किए गए। एनजीटी को सौंपी गई रिपोर्ट में बताया गया कि वायु प्रदूषण का मुख्य कारण अतिक्रमण, टूटे फुटपाथ, व्यावसायिक गतिविधियां, अवैध पार्किंग आदि हैं।
कौशांबी के एक ओर बस डिपो भी है। यहां पर 24 घंटे बसें चलती रहती हैं। बसों के चलने से धूल के कण उड़ते हैं, जिससे भी वायु प्रदूषण रहता है। वहीं, ध्वनि प्रदूषण के लिए यहां पर यूपी रोडवेज ट्रांसपोर्ट और डीटीसी की बसों को जिम्मेदार बताया गया है।
रिपोर्ट में लिखा गया है कि वाहनों के हार्न पूरे दिन बजते हैं। बस चालक जाम लगने व सवारियों को बुलाने के दौरान हार्न बजाते हैं, जो ध्वनि प्रदूषण के कारण हैं।