गाजियाबाद। एएसआर रियलटेक लिमिटेड और राइट अर्थ इंफ्रा एलएलपी के धोखाधड़ी के मामले में ठगी के शिकार निवेशक बिल्डर के लुभावने वादों में फंसकर अपनी जीवनभर की पूूंजी लुटा बैठे। इसी का फायदा उठाकर बिल्डर ने अधिक से अधिक धनराशि ले ली। अब झांसे में फंसे दुकान और मकान के खरीदार पुलिस के चक्कर लगा रहे हैं। पिछले दो हफ्ते से अधिक समय से राजनगर एक्सटेंशन की साइट पर धरना जारी है। शुक्रवार को भी उन्होंने बिल्डर के खिलाफ प्रदर्शन कर नारे लगाए और जल्द पैसे वापस दिलाने की मांग की।
धरने के दौरान पीड़ित प्रदीप चौधरी ने बताया कि दुकान के लिए 75 लाख रुपये की रकम दी। इसमें से 55 लाख ऑनलाइन और 20 लाख रुपये कैश दिए। उनका कहना है कि बिल्डर ने प्री लॉन्चिंग के लिए 25 लाख की रकम रखी थी। उसके बाद अगर आप छह महीने बाद फ्लैट या दुकान नहीं लेना चाहते तो पूरी रकम देने का वादा किया था और बेचने पर मुनाफे का लालच दिया। हम इन लुभावने वादों में फंसते चले गए और अधिकतर पूंजी पजेशन से पहले ही दे दी।
चंचल त्यागी ने 20 लाख रुपये स्टूडियो के लिए पूरा पैसा खाते में जमा करवाया। उनका कहना है कि प्रोजेक्ट 2023 से बन रहा था, कभी कोई विवाद नहीं दिखा तो पैसे देने में दिक्कत नहीं हुई। बबीता गर्ग ने एक करोड़ रुपये में दोनों प्रोजेक्ट में एक में दुकान और दूसरे में थ्रीबीएचके का एक फ्लैट खरीदा। दुकान के लिए एएसआर कंपनी को 80 लाख रुपये में से 53 चेक से और 27 लाख नकद दिए। राइट टू इंफ्रा को फ्लैट के लिए 20 लाख रुपये का चेक दिया। उनका कहना है कि हमें छह महीने बाद दुकान या मकान बेचने पर मुनाफे का लालच दिया गया। शैलेंद्र सिंह ने एएसआर सेंटर एवेन्यू में दो दुकान और एक एंकर स्पेस के लिए 7.50 करोड़ रुपये का भुगतान ऑनलाइन किया है। उनका कहना है कि पहले एक दुकान ली। बाद में कंपनी की ओर से सेम प्राइज पर ही दूसरी दुकान का ऑफर दिया गया। ऑफर ठीक लगने और बाजार मूल्य से कम दाम होने पर एक और ले लिया और फंस गए। देवेेंद्र ने दो स्टूडियो अपार्टमेंट और एक दुकान के लिए 1.26 करोड़ रुपये का भुगतान किया। उनका कहना है कि जब एक दुकान ले ली जाती तो कुछ समय बाद उसी दाम पर दूसरी का ऑफर दिया जाता। इससे लोग लालच में आ जाते और पूरा भुगतान कर देते। 39 लोग तो ऑनलाइन भुगतान वाले हैं। नकद वाले तो सामने नहीं आ रहे हैं। सभी ने एकजुट होकर अभियुक्तों को जल्द गिरफ्तार करने और पैसा लौटाने की मांग की। पुलिस कमिश्नर को फिर इस संदर्भ में पत्र सौंपा।