दिल्ली मेरठ रोड पर झुका हुआ खंभा। संवाद
गाजियाबाद। कांवड़ यात्रा में 172 खंभों और 563 ट्रांसफार्मरों से खतरा पैदा हो सकता है। इतना ही नहीं, 359 स्थानों पर नंगे तार भी मिले हैं। इसका खुलासा ऊर्जा निगम की तकनीकी टीम के सर्वे में हुआ है। अब अफसरों ने सर्वे रिपोर्ट के आधार पर खामियों को दूर करने का प्रयास शुरू कर दिया है। इस पर करीब 50 लाख की धनराशि खर्च होने का अनुमान है। इस बार महाशिवरात्रि 11 अगस्त की है। 20 जुलाई से गंगनहर पटरी मार्ग से कांवड़िये आने शुरू हो जाएंगे।
30 जुलाई के बाद दिल्ली-मेरठ हाईवे पर भी कांवड़ियों का दबाव बढ़ना शुरू होगा। इसी को देखते हुए नगर निगम, नगर पालिका और जिला पंचायत के स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसी क्रम में ऊर्जा निगम ने भी अपने कार्यक्षेत्र की खामियों का पता लगाने के लिए सर्वे कराया था। इसमें गंगनहर कांवड़ पटरी, पाइपलाइन मार्ग, दिल्ली-मेरठ हाईवे, दूधेश्वरनाथ मंदिर, ग्रामीण इलाकों के संपर्क मार्ग जहां से कांवड़िये अधिक संख्या में गुजरते हैं, उन मार्गों पर लगे विद्युत खंभे, ट्रांसफार्मर, नंगे तार आदि की स्थिति को देखा गया।
ऊर्जा निगम के अधीक्षण अभियंता महेश उपाध्याय ने बताया कि कांवड़ यात्रा को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से 10928 खंभों पर पॉलीथिन बांधने, 635 डबल खंभों और 563 ट्रांसफार्मरों पर बैरिकेडिंग की जाएगी। 359 नंगी तारों को ढका जाएगा, ताकि करंट उतरने का खतरा न रहे। 172 खंभे जर्जर हो चुके हैं, जिनको बदलने का काम भी तुरंत शुरू कराया जाएगा। 20 जुलाई से पहले यह काम पूरा कराया जाएगा। इन तैयारियों पर ऊर्जा निगम अनुमानित 50 लाख की राशि खर्च करेगा।
21 हजार पेड़ों की होगी छंटाई : कांवड़ मार्ग में अवरोध पैदा करने वाले 21 हजार पेड़ों की छंटाई का काम भी जल्द शुरू किया जाएगा। इसको लेकर वन विभाग से अनुमति लेने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसका सुझाव भी सर्वे में दिया गया था। ग्रामीण रास्तों और गंगनहर पटरी मार्ग पर कई जगह तो टहनियां झुककर रास्ते में आ गई हैं। जबकि कई पेड़ बारिश आंधी में भी गिर गए थे। प्रशासन का प्रयास है कि कांवड़ियों को रास्ते से गुजरने में कोई दिक्कत का सामना न करना पड़े।