सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी की सख्ती के बाद सीएनजी वाहनों की डिमांड बढ़ गई है। लोगों को भी सीएनजी वाहनों का संचालन काफी सस्ता पड़ रहा है। जगह-जगह नए सीएनजी पंप खुलने से गैस भरवाने में भी दिक्कत नहीं रही। इसके चलते डीजल वाहनों की खरीद में एकाएक गिरावट आ गई है।
कुछ माह पहले तक ज्यादातर लोगों की पसंद डीजल की गाड़ियां थीं। लोग सस्ता सफर करने के लिए डीजल की गाड़ियों को पसंद करते थे। पेट्रोल के बढ़ते दामों के चलते डीजल गाड़ियों की बिक्री में बड़ी तेजी आ गई थी। सीएनजी वाहनों को ज्यादा पसंद नहीं किया जाता था। सीएनजी वाहनों के पिकअप को धीमा मानते हुए ज्यादातर लोग इनको पसंद नहीं करते थे। टैक्सी वाहनों में ही सीएनजी की मांग थी।
पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी ने डीजल वाहनों के संचालन पर सख्ती करनी शुरू कर दी। इसकेसाथ ही सीएनजी वाहनों को प्राथमिकता दी जाने लगी। दिल्ली में पिछले दिनों शुरू किए गए ऑड-ईवन में भी सीएनजी वाहनों को छूट मिली। इसका असर सीएनजी वाहनों की खरीदारी पर पड़ा।
वाहनों का तुलनात्मक अध्ययन
वर्ष 2014 में वाहनों की खरीद
पेट्रोल वाहन 58423
डीजल वाहन 13388
सीएनजी वाहन 3837
वर्ष 2015 में वाहनों की खरीद-
पेट्रोल वाहन 64245
डीजल वाहन 13791
पेट्रोल वाहन 5014
वर्ष 2016 में वाहनों की खरीद-
पेट्रोल वाहन 15097
डीजल वाहन 2473
सीएनजी वाहन 4796
प्रदूषण के लगातार बढ़ने और सुप्रीम कोर्ट-एनजीटी की सख्ती के चलते डीजल वाहन खरीदने वालों की संख्या में कमी आ रही है। सीएनजी वाहन खरीदने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है। एनसीआर में डीजल वाहनों को सीएनजी वाहनों ने पीछे छोड़ दिया है।
- मयंक ज्योति, आरटीओ ।