कंस्ट्रक्शन फर्म की लेटलतीफी से नगर निगम की आमदनी के सपनों पर पानी फिर गया। आमदनी बढ़ाने के लिए रमतेराम रोड पर कामर्शियल कांप्लेक्स और नेहरू नगर में आडिटोरियम का निर्माण शुरू कराया था। इनके बनाने की मियाद कब की खत्म हो चुकी है, मगर दोनों ही प्रोेजेक्ट अटके पड़े हैं। इनकम के चक्कर में निगम के 63 करोड़ रुपये भी फंस गए। अब इन दोनों प्रोजेक्ट की अब लागत भी बढ़ गई है।
वर्ष 2011-12 में नगर निगम ने रमते राम रोड पर कामर्शियल कांप्लेक्स और दो मंजिला पार्किंग का निर्माण शुरू किया था। 18 महीने में इसका निर्माण पूरा होना था। सेंट्रल एसी इस बिल्डिंग की दो मंजिलों पर दुकानों और दो बेसमेंट में पार्किंग बनाई जानी है। शुरुआत में इसकी लागत करीब 32 करोड़ थी, लेकिन फर्म ने काम की रफ्तार धीमी रखी। इसके बाद इसका एस्टिमेट रिवाइज करना पड़ा। अब लागत बढ़कर तकरीबन 40 करोड़ पहुंच गई है। फर्म ने इसका काम बीच में ही छोड़ दिया।
निगम को इस कांप्लेक्स से 8-10 करोड़ की एकमुश्त और एक करोड़ से ज्यादा सालाना इनकम मिलती, लेकिन फर्म की वजह से निगम को आमदनी तो हुई ही नहीं, वहीं पैसा भी फंस गया।
इसी प्रकार निगम ने वर्ष 2012 में नेहरू नगर में आडिटोरियम निर्माण का प्रस्ताव पास कर जनवरी 2013 में वर्क आर्डर जारी कर काम शुरू कराया। 22.93 करोड़ की लागत से बनने वाले आडिटोरियम में क्लब, फूड कोर्ट जैसी सुविधाएं विकसित की जानी थी, ताकि निगम को आमदनी हो सके। इसका निर्माण वर्ष 2014 में पूरा होना था।
दोनों ही काम अवस्थापना निधि से कराए गए हैं। यह काम भी पीएमएस नाम की उसी फर्म को दिया गया था, जो रमतेराम रोड कामर्शियल कांप्लेक्स का निर्माण कर रही थी। फर्म ने अब इस आडिटोरियम का निर्माण भी अधूरा छोड़ दिया है। निगम का पैसा यहां भी फंस गया।
फर्म का ठेका किया निरस्त
रमतेराम रोड कामर्शियल कांप्लेक्स बनाने वाली फर्म पीएमएस बिल्डटेक का ठेका निरस्त कर दिया गया है। उसकी सिक्योरिटी मनी जब्त की जाएगी। आडिटोरियम की फाइल भी तलब की गई है। इसका ठेका भी निरस्त कर जमानत राशि जब्त की जाएगी। फर्म के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। - अब्दुल समद, नगर आयुक्त।