प्रदेश में सबसे पहले गाजियाबाद को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) बनाने के लिए प्रशासन के पास महज डेढ़ माह का मौका बचा है। मार्च तक जनपद को ओडीएफ करना है और अब तक पांच हजार से अधिक घरों में शौचालय नहीं बने हैं। ऐसे में, प्रशासन अब विशेष तैयारी में जुट गया है।
गाजियाबाद को मार्च 2017 में ओडीएफ करने के लिए वर्ष भर प्रशासन की ओर से कार्य किया गया, लेकिन चुनाव की वजह से लगी आचार संहिता के चलते इसकी गति धीमी पड़ गई। आचार संहिता की वजह से अनुदान राशि भी नहीं दी जा सकती। ऐसे में, सिर्फ जागरूकता अभियान के बल पर लोगों को शौचालय बनाने के लिए प्रोत्साहित करना चुनौती है।
डीपीआरओ वीरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि गांवों में जिन घरों में शौचालय नहीं हैं, वहां जाकर लोगों की काउंसिलिंग की जाएगी कि वे अपने खर्च से शौचालय बनवाएं। आर्थिक तौर पर समर्थ लोगों को आगे आने के लिए कहा जाएगा। इसके साथ ही जो लोग अनुदान राशि के पात्र होंगे, उन्हें 11 मार्च के बाद राशि दी जाएगी।
इससे पूर्व उन्हें स्वयं से शौचालय का निर्माण आरंभ कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
इनसेट: आज बुलाई जाएगी चैंपियन की बैठक
ओडीएफ बनाने के लिए शनिवार को जिला प्रशासन कार्यालय पर प्रशासन द्वारा गांवों में बनाए गए स्वच्छता चैंपियन की बैठक बुलाई गई है। बैठक में स्वच्छता अभियान की प्रगति पर विचार किया जाएगा। इसकी भी समीक्षा होगी कि किन गांवों में शौचालय बनवाना है और आर्थिक तौर पर संपन्न होते हुए भी लोग कहां शौचालय नहीं बनवा रहे हैं।