गाजियाबाद। आयुष्मान भारत योजना के पैनल में होने के बाद भी सरकारी व निजी अस्पताल इलाज करने से इन्कार नहीं कर सकेंगे। अस्पतालों को आयुष्मान पैनल में शामिल होने और मिलने वाली चिकित्सीय सुविधाओं की जानकारी अस्पताल परिसर और बाहर डिस्प्ले बोर्ड व बैनर के माध्यम से जानकारी प्रकाशित करनी होगी। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने पैनल पर मौजूद अस्पताल संचालकों को निर्देश जारी किया है।
अमर उजाला में
आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद नहीं मिल रहा इलाज
शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद जिलाधिकारी ने सीएमओ को निर्देश जारी कर कहा कि योजना से जुड़े सभी अस्पतालों में मिलने वाले इलाज के बारे में जानकारी देने के लिए परिसर में डिस्प्ले बोर्ड और बैनर लगवाया जाए। इसकी पुष्टि करते हुए आयुष्मान के नोडल अधिकारी डॉ. राजेश तेवतिया ने बताया कि आयुष्मान योजना से जुड़े सभी अस्पताल संचालकों को पत्र जारी कर निर्देश दिया गया है कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के प्रचार-प्रसार के लिए चिकित्सालय के प्रांगण एवं बाहर बैनर, वाल पेंटिंग, डिस्प्ले बोर्ड लगाना सुनिश्चित करना होगा। साथ ही चिकित्सालय के आयुष्मान नोडल अधिकारी, आयुष्मान मित्र और चिकित्सालय शिकायत प्रबंधक का फोन नंबर भी डिस्प्ले बोर्ड पर अंकित करना होगा। जिससे किसी भी स्थिति में कार्डधारक योजना का लाभ लेने में वंचित न हो सके।
इलाज की जानकारी नहीं होने पर मरीज भटकने के लिए मजबूर
जिले में सात लाख से अधिक आयुष्मान गोल्डन कार्ड धारक हैं। यह आयुष्मान भारत योजना के पैनल में शामिल सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक का इलाज करा सकते हैं। जिले में 83 निजी अस्पताल व सरकारी में तीन बड़े अस्पताल, चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। कई निजी अस्पताल पैनल पर होने के बावजूद कार्डधारक का उपचार करने में आनाकानी करते हैं। वहीं, कई निजी अस्पताल संचालक मरीज के रोग संबंधित उपचार न होने की गलत सूचना दे देते हैं। इस कारण मरीज इलाज के लिए चक्कर काटते हैं।