मेरठ और गढ़मुक्तेश्वर के बाद अब गाजियाबाद में भी तेंदुए की आहट है। ग्रामीणों ने हिंडन एयरबेस के निकट और सिटी फॉरेस्ट के पीछे फैले जंगल में तेंदुआ देखने का दावा किया है। इसके बाद एयरबेस ने तेंदुआ पकड़ने के लिए वन विभाग से पिंजरा मंगा लिया है।
बता दें कि मई के पहले सप्ताह में मेरठ में एक तेंदुआ शहर में घुस गया था, जिसे काफी मशक्कत के बाद बेहोश कर पकड़ा गया था। पांच महीने पहले गढ़ में भी तेंदुआ घुसा था। गाजियाबाद में हिंडन एयरबेस के पीछे निस्तोली का जंगल है, जहां जंगली सुअरों का शिकार करने एक तेंदुआ आता है।
ग्रामीणों ने इस जंगल में पिछले दिनों तेंदुआ को देखने का दावा कर एयरबेस कर्मियों को इसकी जानकारी दी है। डीएफओ बीपी सिंह ने बताया कि एयरबेस ने वन विभाग से पिंजरा मांगा था, जो उन्हें उपलब्ध करा दिया गया है।
उन्होंने बताया कि एक साल पहले भी यहां एक तेंदुआ देखा गया था। तब भी एयरबेस ने पिंजरा मंगाया था और तेंदुआ को पकड़ने की पूरी कोशिश की गई थी, लेकिन वह भाग निकला था। अब तेंदुआ के फिर लौटने के संदेह के चलते फिर पिंजरा मंगाया गया है।
डीएफओ ने बताया कि इन दिनों जंगली सुअरों की गणना का काम चल रहा है लेकिन तेंदुआ का कोई फुट प्रिंट नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि अक्सर गर्मी में ही पानी की तलाश में वन्य जीव घने जंगलों से बाहर निकलते हैं। पिछले साल मोदीनगर में गर्मी के दिनों में ही एक तेंदुआ मृत हालत में मिला था।
गाजियाबाद में 651 हेक्टेयर में जंगल
गाजियाबाद में जंगल काफी घट गया है। अब यहां 651 हेक्टेयर में जंगल सिमट गया है। मोहम्मदपुर, आमद, चूडियाला, तलहेटा, बागपत और फरीदनगर में जंगल बचा है। इन क्षेत्रों में मुख्य रूप से जंगली सुअर व नीलगायें हैं। सबसे अधिक जंगली सुअर चूडियाला में हैं।
जिले में एक ही पिंजरा
जिले में तेंदुआ जैसे खतरनाक जानवर को पकड़ने के लिए एक ही पिंजरा है। पिंजरे की लंबाई छह फीट और चौड़ाई पांच फीट है। पिंजरे की बनावट ऐसी है कि उसमें पांव रखते ही जानवर कैद हो जाते हैं। हिंडन एयरबेस के मुख्य सुरक्षा अधिकारी मनोज मिश्रा ने कहा कि उन्होंने वन्य जीव को पकड़ने के लिए वन विभाग से पिंजरा मंगाया है।