लोनी। प्रेमनगर के प्राथमिक विद्यालय में बुधवार सुबह मिड डे मील योजना के तहत दिया गया दूध पीने से 25 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। किसी के पेट में दर्द हुआ तो किसी के सिर में। कई बच्चों को उल्टी लग गई। सभी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर ले जाया गया। तीन की हालत गंभीर थी, उन्हें जिला एमएमजी अस्पताल भेज दिया गया।
बीमार पड़े बच्चों ने बताया कि दूध का स्वाद खट्टा था, इसमें अजीब सी गंध भी आ रही थी। अगर वे पीने से मना करते, तो पिटाई की जाती, इस डर से पी लिया। दूध का स्वाद खराब होने की शिकायत कर चुके थे। हर बार डांटकर उन्हें चुप कर दिया जाता। सात दिन पहले दूध पीते ही कुछ बच्चों के पेट में दर्द हो गया था, लेकिन तबीयत ज्यादा नहीं बिगड़ी थी।
इस विद्यालय में आर्यनगर, प्रेमनगर, टोली मोहल्ला, इकरामनगर समेत आसपास के इलाके के 514 बच्चे पढ़ते हैं। बच्चों की तबीयत बिगड़ने की सूचना पर पहुंचे अभिभावकों ने हंगामा कर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चे घर पर आकर मिड डे मील के नाम पर घटिया गुणवत्ता का खाना दिए जाने की शिकायत करते हैं। उन्होंने स्कूल में आकर शिकायत की तो प्रधानाध्यापिका ने सुनवाई नहीं की। बच्चों ने बताया है कि दूध नहीं मंगाया जाता है। मिल्क पाउडर में पानी घोलकर दूध तैयार किया जाता है। इसी को बांटा जाता है।
हंगामे का पता चलने पर पुलिस फोर्स के साथ पहुंचे एसडीएम अरुण दीक्षित ने पूरे मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद खाद्य एवं सुरक्षा विभाग की टीम को बुलाया गया। सहायक खाद्य आयुक्त विनित कुमार ने बताया कि ने स्कूल से दूध, तहरी, कच्चा चावल, हल्दी पाउडर, मिर्ची पाउडर, रिफाइंड और सोयाबीन तेल के नमूने लिए गए हैं। 15 दिनों में रिपोर्ट आएगी।
बच्चे रोते रहे फिर भी दूध बांटता रहा स्टाफ
छात्र जुनैद और आयान ने बताया कि दूध पीते ही दो बच्चों के पेट में दर्द हुआ था। उन्होंने शिकायत की। इसके बाद भी स्कूल का स्टाफ दूध बांटता रहा। बच्चे पीते रहे और बीमार पड़ते रहे। तीन बच्चों को चक्कर आ गया। उनसे कह दिया गया कि एक तरफ बैठ जाओ। कई बच्चों ने गिलास में दूध लेने से मना किया। उन्हें डांटा गया और कहा गया कि चुपचाप पी लो। बीमार पड़े कई बच्चे रोने लगे लेकिन स्टाफ देखकर भी अनदेखा करता रहा। जब कुछ बच्चों को उल्टी हो गई, तब दूध का वितरण रोका गया। इसके बाद ही बीमार पड़े सभी 25 बच्चों को अस्पताल भेजा गया।
आरोप : फल कभी बंटे नहीं सूजी, आलू में निकले कीड़े
लोनी। इसी स्कूल में रसोइया रहीं सन्नो का आरोप है कि यहां मिड डे मील के नाम पर बड़ा घपला किया जा रहा है। उन्होंने इसकी शिकायत संपूर्ण समाधान दिवस में की। इस पर उन्हें स्कूल से हटा दिया गया। उन्होंने बताया कि वह पांच साल रसोइया रही हैं। स्कूल में छह लीटर दूध मंगाया जाता था। उसमें 15 लीटर पानी मिलवाया जाता था। स्टाफ कहता था, मिड डे मील में रोटी कम और चावल ज्यादा पकाया करो। कई बार सूजी में कीड़े मिले। एक बार चावल-आलू में कीड़े थे, जिससे खाकर छात्रों ने उल्टी की थी। पांच साल में एक बार भी स्कूल में मिड डे मील के तहत बच्चों को फल नहीं दिए गए।
प्रधानाध्यापिका ने कहा, साजिश हुई है
स्कूल की प्राधानाध्यापिका ऊषा रानी का कहना है कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने के मामले में कोई साजिश है। वह 13 साल से इस विद्यालय में हैं। मिड डे मील में इससे पहले कभी कोई परेशानी नहीं आई है। बुधवार को बच्चों की तबीयत कैसे बिगड़ी, इसकी जानकारी नहीं है। वह दुर्गापुरी चौक से 20 लीटर दूध खुद लाई थीं।
एसडीएम बोले, कराई जाएगी जांच
एसडीएम अरुण दीक्षित ने बताया कि खंड शिक्षा अधिकारी मौके पर गए थे। अभिभावकों का कहना था कि दूध मिल्क पाउडर से बनाया गया, जबकि रसोइये ने दूध को बाजार से लाया गया और सही बताया। पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।