गढ़ में न हो जाए अलीगढ़ जैसा शराब कांड
गढ़मुक्तेश्वर। अलीगढ़ में जहरीली शराब के सेवन से दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। अगर आबकारी विभाग ने गढ़ क्षेत्र में अवैध शराब पर शिकंजा न कसा तो यहां भी अलीगढ़ जैसी घटनाएं हो सकती हैं।
गढ़ खादर क्षेत्र के जंगल और आसपास के गांवों में अवैध(कच्ची) शराब बनाने और बेचने का काम धड़ल्ले से चल रहा है। कच्ची शराब 20 रुपये में आसानी से लोगों को उपलब्ध है। इसके अलावा क्षेत्र में चोरी से अवैध शराब बेचने के मामले भी कई बार सामने आ चुके हैं। बार-बार कार्रवाई के बाद भी शराब माफिया अपने कारनामों से बाज नहीं आ रहे हैं। देशी शराब का 180 एमएल के पव्वे की कीमत 70 रुपये है, वहीं अवैध रुप से बनाए जाने वाली कच्ची शराब की इससे ज्यादा मात्रा 20 रुपये में उपलब्ध हो जाती है। सस्ती और आसानी से उपलब्ध होने के चलते खादर क्षेत्र के गांवों में लोग बड़े पैमाने पर कच्ची शराब खरीदते हैं।
सेहत के लिए खतरनाक है यह शराब
कच्ची शराब सेहत के लिए बेहद हानिकारक है। यह खराब हो चुके गुड, शीरे, नौसादर,यूरिया और यीस्ट से तैयार की जाती है। शराब को अधिक नशीली बनाने के लिए इसमें कभी-कभी ऑक्सीटोसिन भी मिला दिया जाता है।
मिथाइल एल्कोहल के कारण बन जाती है जहर
विशेषज्ञों के अनुसार देशी व अंग्रेजी शराब बनाने के लिए डिस्टलरी में एक निश्चित तापमान पर शोधन किया जाता है। इसलिए यह शराब इथाइल एल्कोहल ही रहती है। अवैध रूप से तैयार की जाने वाली शराब बनाने के दौरान कोई सावधानी नहीं बरती जाती। शोधन ठीक से न होने और खतरनाक पदार्थ मिलाने के चलते यह मिथाइल एल्कोहल में परिवर्तित होकर जहरीली हो जाती है। मिथाइल एल्कोहल की मात्रा अधिक होने पर शराब जहरीली हो जाती है।
इन इलाकों में चल रहा नशे का अवैध कारोबार
गढ़ गंगा खादर क्षेत्र के गांव नयाबांस, गड़ावली, इनायतपुर, पलवाड़ा, पसवाड़ा, पूठ, शंकराटीला, भंगवतपुर, गांवडी, गड़ावली, शाहपुर, अब्दुल्लापुर, किरयावली, चक लठीरा, कल्याणवाली मढैय़ा, रेतो वाली, शेरा-कृष्णा वाली मढैया समेत कई गांवों में अवैध शराब तैयार की जाती है।
ड्राई जोन में भी बिक रही अवैध शराब
गंगानगरी ब्रजघाट धार्मिक स्थल होने के चलते ड्राई जोन में शामिल है। इसके बावजूद भी ब्रजघाट में अवैध रुप से दुकानों और खोखों पर शराब की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। जिसे खरीदने वाले अधिकांश गंगानगरी में भिक्षाटन कर जीवनयापन करने वाले लोग हैं।
पहले भी कहर बरपा चुकी है जहरीली शराब
मार्च 2009 में होली के ऐन मौके पर थिनर से तैयार की गई शराब ने बहादुरगढ़ के गांव कनौर में सात लोगों की जिंदगी छीन ली थी। दो दिन बाद ही जहरीली शराब से मौत होने का सिलसिला क्षेत्र के नानपुर, शरीकपुर, डिबाई, खुड़लिया, देवली, ढाना समेत कई गांवों तक पहुंच गया था। जिससे गढ़ क्षेत्र में 24 घंटों के भीतर कुल 32 लोगों को मौत की नींद सुला दिया था। वहीं नवंबर 2020 में ब्रजघाट में अवैध रुप से बिक रही शराब के सेवन से 14 लोगों की मौत हुई थी, हालांकि पुलिस-प्रशासन ने इस मामले में जहरीली शराब से मौत को सिरे से नकार दिया था।
आबकारी द्वारा घोषित शराब माफिया
गढ़ सर्किल क्षेत्र में आबकारी विभाग द्वारा अवतार सिंह चौहान, निरंजन, ताराचंद, रुपेश, सीताराम, विनोद, कैलाश, हरपाल, विपिन, मनोज, विजयपाल, बबलू, लटूर, कलवा समेत दो दर्जन से अधिक लोगों को शराब माफिया की सूची में रखा गया है। इन सभी लोगों के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत कई बार कार्रवाई की जा चुकी हैं।
आबकारी विभाग का दावा: लगातार हो रही कार्रवाई
अवैध और कच्ची शराब के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाता है। शराब तस्करों की धरपकड़ भी की जाती है, लेकिन अधिकांश तस्कर जमानत पर छूटने के बाद दोबारा इसी काम में जुट जाते हैं। वर्तमान में भी अवैध शराब के खिलाफ अभियान जारी है।
-सीमा कुमारी, आबकारी निरीक्षक, गढ़