बोर्ड की रोक के बावजूद नगर निगम अफसरों ने प्राइवेट बिल्डर की कालोनी अवंतिका को गुपचुप टेकओवर कर लिया। आधी-अधूरी सुविधाओं वाली इस कालोनी को टेकओवर करने की भनक न तो कार्यकारिणी को लगी और न ही निगम सदन को।
महापौर अशु वर्मा को भी इस बड़े निर्णय से अनजान रखा गया। बुधवार को पार्षदों को इसकी भनक लगी तो उन्होंने नगर आयुक्त पर बिल्डर को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाकर महापौर से मामले की जांच कराने की मांग की। उन्होंने बोर्ड बैठक में प्रस्ताव लाकर निर्णय पर रोक लगाने को भी कहा। ऐसे में अब यह मामला आगामी बोर्ड बैठक में गूंजेगा।
भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी ने बुधवार को निगम में प्रेसवार्ता कर नगर आयुक्त और निगम के अन्य विभागों के अफसरों पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब दो साल पहले भी निगम अफसरों ने इस अधूरी कालोनी को टेकओवर करने का प्रयास किया था, लेकिन विरोध के बाद यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।
आरोप है कि इस कालोनी में तकरीबन 149 करोड़ का काम बाकी है। अफसरों ने सुविधा शुल्क लेकर जनसुविधा के काम पूरा कराए बिना ही कालोनी को निगम पर थोप दिया। अब निगम को अपने फंड से कालोनी में विकास कराने पड़ेंगे।
आंकड़ों में अवंतिका कालोनी
82 एकड़ क्षेत्र में फैली है यह आवासीय कालोनी
1996 में अंसल बिल्डर ने शुरू किया था डेवलपमेंट
5 साल में करना था पूर्ण विकास
2001 में नक्शा कराया रिवाइज
करीब 850 से ज्यादा हैं प्लाट
650 से ज्यादा प्लाट्स पर बन चुके मकान
कालोनी की कमियां
सीवर लाइनों का डिस्चार्ज नहीं, अवैध रूप से चिरंजीव विहार से जोड़ी
सड़कों की चौड़ाई पास कराए नक्शे से छोटी
18 में से 5 पार्क नहीं मिले रेजिडेंट्स को
ड्रेनेज सिस्टम नहीं
कूड़ा कलेक्शन सेंटर की जगह नहीं
सीवर ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगाया गया
जीडीए पूर्व में अपनी रिपोर्ट में बता चुका है कि अभी कालोनी में 149 करोड़ के काम बाकी हैं। काम पूरा हुए बिना कालोनी को टेकओवर नहीं लिया जाना चाहिए था। एक महीना पहले हमने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर कालोनी टेकओवर न करने की मांग की थी। इसके खिलाफ मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे। - हृदेश बंसल, आरडब्ल्यूए अध्यक्ष, अवंतिका
मेरे संज्ञान में भी कालोनी टेकओवर का मामला नहीं लाया गया। नगर आयुक्त से वार्ता की जाएगी। मामले की जांच कराई जाएगी कि किन परिस्थितियों में और अधूरी कालोनी को क्यों टेकओवर किया गया। बोर्ड बैठक में पार्षदों से चर्चा कर सदन की मंशा के मुताबिक निर्णय लिया जाएगा। - अशु वर्मा, महापौर
जनवरी-फरवरी में ही यह प्रक्रिया की गई थी। टेकओवर की प्रक्रिया पारदर्शिता से अफसरों की रिपोर्ट के बाद पूरी की गई है। बिल्डर से सुविधाओं के लिए पैसा भी जमा कराया गया है। निगम एक्ट में कहीं नहीं लिखा कि इससे पहले कार्यकारिणी या सदन की अनुमति ली जाएगी। यह प्रशासनिक निर्णय होता है। - अब्दुल समद, नगर आयुक्त।