गुरु सिंह गुरुद्वारा में मनाई गई श्रीगुरु गोबिंद सिंह की जयंती
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आयुध निर्माणी फैक्टरी मार्ग स्थित गुरु सिंह गुरुद्वारा में रविवार को श्रीगुरु गोबिंद सिंह की जयंती मनाई गई। गुरुद्वारा सचिव दर्शन सिंह ने बताया कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म पटना साहिब में हुआ था। उनके पिता श्री गुरु तेग बहादुर जी सिखों के नौवें गुरु थे, जिन्होंने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। माता गुजरी जी ने गुरु गोबिंद सिंह जी को संस्कार, साहस और करुणा की शिक्षा दी। बाल्यकाल से ही गुरु गोबिंद सिंह जी असाधारण प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने संस्कृत, फारसी, ब्रज और पंजाबी भाषाओं का ज्ञान प्राप्त किया। वे कुशल धनुर्धर, तलवारबाज और रणनीतिकार भी थे।
मात्र नौ वर्ष की आयु में वे सिखों के गुरु बने और उस समय देश सामाजिक अन्याय, धार्मिक उत्पीड़न और अत्याचार से जूझ रहा था। गोबिंद सिंह जी सिख धर्म के 10वें सिख गुरु थे, जिन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की थी। साथ ही उन्होंने खालसा पंथ की रक्षा के लिए मुगलों से 14 बार युद्ध भी किया था। उन्होंने कहा था कि मनुष्य की सारी जातियां एक ही हैं, सबको एक समान मानना चाहिए।
श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने कहा है कि सवा लाख से एक लड़ाऊं, चिड़ियन ते मैं बाज तुड़ाऊं, तबै गुरु गोबिंद सिंह नाम कहाऊं। मोदीनगर से आए रागी जत्थे में बीबी गुरमीत कौर ने शब्द कीर्तन से संगत को निहाल किया। ज्ञानी अमरजीत सिंह ने अरदास की। इस अवसर पर लंगर का आयोजन किया गया। सचिव दर्शन सिंह, ओंकार सिंह, गगनदीप सिंह, जरनैल सिंह, तरन तारन सिंह, टोनी, हरभजन सिंह, मंजू सिंह, हरजीत सिंह, देवेंद्र सिंह, जसविंदर कौर, सुरिन्द्र कौर, सोनी, हरमनजीत सिंह, मनराज सिंह आदि मौजूद रहे।