कंक्रीट के जंगल में तब्दील होते हॉट सिटी और प्रदेश के अन्य शहरों में पर्यावरण संरक्षण का जिम्मा आवास एवं विकास परिषद ने भी उठाया है। परिषद की योजनाओं में अगर इमारत बनानी है तो हरियाली का विशेष ध्यान रखना होगा। परिषद ने 'पर्यावरण रत्न' योजना शुरू की है। इसके अंतर्गत योजनाओं में जमीन लेने वाले बिल्डरों को हरियाली का विशेष ध्यान रखने का शपथपत्र परिषद को देना होगा।
आवास एवं विकास परिषद मुख्यालय से जारी पत्र में प्रदेश के सभी जोन को योजना के संबंध में निर्देशित किया गया है। योजना में पोस्टर, बैनर, रैली, जुलूस और अन्य माध्यमों से लोगों को पर्यावरण के प्रति सचेत किया जाएगा। इतना ही नहीं किसी भी योजना में प्लॉट या फ्लैट आवंटित करने से पहले बिल्डरों से पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए एक शपथ पत्र भी लिया जाएगा। आवास आयुक्त आरपी सिंह ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय प्रशासन की भी अभियान में मदद ली जाएगी।
सिर्फ उन्हीं बिल्डरों को जमीन दी जाएगी जो हरियाली बढ़ाने के लिए शपथ पत्र देंगे।
हर साल एक संस्था को किया जाएगा पर्यावरण रत्न से सम्मानित: पर्यावरण के प्रति अच्छा काम करने वाली संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के लिए परिषद संस्थाओं को सम्मानित भी करेगी। हर साल अलग-अलग सोसायटीज और संस्थानों का निरीक्षण कर सबसे अधिक हरियाली वाले संस्थानों को 'पर्यावरण रत्न' से भी सम्मानित किया जाएगा।
शिक्षण और अन्य संस्थान ढूंढेंगे पर्यावरण संरक्षण के उपाय: परिषद की वर्तमान योजना में चल रहे सभी स्कूल, कालेज, अस्पताल और अन्य संस्थानों को भी इस योजना में अनिवार्य रूप से हिस्सा लेना होगा। विचार गोष्ठी, पोस्टर, बैनर और अन्य माध्यमों से संस्थान लोगों से पर्यावरण संरक्षण की अपील करेंगे। सभी संस्थानों को इस संबंध में जल्द ही दिशा निर्देश जारी किए जाएंगे।