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रजिस्ट्रेशन के खेल मंे नपे स्वास्थ्य विभाग के लिपकि

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पंजीकरण के नाम पर वसूली के खेल में नपे एसीएमओ-लिपिक
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गाजियाबाद। नर्सिंग होम के रजिस्ट्रेशन और अल्ट्रासाउंड केंद्र नवीनीकरण के नाम पर स्वास्थ्य विभाग में चल ही वसूली का खेल उजागर हुआ है। धड़ल्ले से उगाही का मामला सामने आने पर जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने सीएमओ को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। संबंधित पटल का कार्यभार संभाल रहे अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को तत्काल हटाने और लिपिक को निलंबित करने का निर्देश दिया है। साथ ही पूरे मामले में सीएमओ से विस्तृत रिपोर्ट भी तलब कर ली है।
गौरतलब है कि अमर उजाला ने 23 नवंबर के अंक में ‘चिकित्सकों के पंजीकरण बढ़े, होगी जांच’ शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी, जिसके बाद प्रशासन पूरे मामले को लेकर हरकत में आया। जिलाधिकारी द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि जिले में नए नर्सिंग होम खोले जाने के पंजीकरण और अल्ट्रासाउंड मशीनों के नवीनीकरण पर चिकित्सा विभाग कतिपय अधिकारी और कर्मचारी द्वारा अनुचित लाभ लेने की शिकायत की गई थी। इस पर डीएम ने संज्ञान लेते हुए अस्पतालों, नर्सिंग होम के पंजीकरण और अल्ट्रासाउंड मशीनों के नवीनीकरण से संबंधित सभी दस्तावेज स्वास्थ्य विभाग से मांगे हैं। साथ ही लिपिक आलोक कुमार को तत्काल निलंबित और अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. विश्राम सिंह को हटाए जाने का निर्देश डीएम ने दिए हैं। इस पूरे मामले में जिलाधिकारी ने सीएमओ से जांच कर रिपोर्ट मांगी है। सीएमओ डॉ. एनके गुप्ता ने बताया कि अभी इस तरह के आदेश की कॉपी नहीं मिली है। कुछ दिन पहले जिलाधिकारी ने रजिस्ट्रेशन के पंजीकरण में मिली शिकायत की जांच करने के लिए निर्देश दिए थे, उसकी जांच की जा रही है। आदेश की कॉपी मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
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पांच हजार से लेकर लाखों तक में रेट
सूत्रों के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग में नर्सिंग होम के रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण के नाम पर मोटी रकम मांगी जाती है। पांच हजार रुपये से लेकर दो लाख रुपये सुविधा शुल्क के नाम पर लेकर रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण का काम किया जाता है, जो चिकित्सक इन डिमांड को पूरी नहीं कर पाते वो नियमों और दस्तावेजों को पूरा करने में उलझे रहते हैं।
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डीएम रितु माहेश्वरी ने भी की थी संस्तुति
28 जनवरी को तत्कालीन डीएम रितु माहेश्वरी ने सीएमओ को निर्देश दिया था कि डॉ. विश्राम सिंह व लिपिक को तत्काल हटाया जाए। उनके बाद रस्म अदायगी के लिए सीएमओ की तरफ से कागजों में कार्यभार हटाया गया लेकिन रितु माहेश्वरी के हटते ही डॉ. विश्राम सिंह और लिपिक को फिर से स्वास्थ्य विभाग की सबसे मलाईदार सीट पर लाकर बैठा दिया गया। इससे शीर्ष अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
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