जीआईएस सर्वे के बाद बढ़ा मकानों का हाउस टैक्स, निगम ने भेजे नोटिस
गाजियाबाद। अप्रैल से शहर के अधिकांश भवन मालिकों की जेब पर हाउस टैक्स का बोझ फिर बढ़ेगा। अब उन्हें अंदाजन नहीं बल्कि जीआईएस सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर टैक्स चुकाना होगा। नगर निगम के कर विभाग ने सर्वे रिपोर्ट के आधार पर लोगों को हाउस टैक्स के नोटिस भेजने शुरू कर दिए हैं। करीब 5 हजार भवन मालिकों को नोटिस भेजे जा चुके हैं। नए नोटिस में भवन मालिकों के हाउस टैक्स में 20 से 50 फीसदी तक बढ़ोतरी हो गई है।
दरअसल, करीब डेढ़ दशक से शहर में भवनों का सर्वे नहीं हुआ था। ऐसे में 15-20 साल पहले जो भवन बने हुए थे, उनमें हुए अतिरिक्त निर्माण का डेटा नगर निगम के पास नहीं है। इनका निर्माण क्षेत्रफल बढ़ जाने के बावजूद अधिकांश भवनों पर टैक्स नहीं बढ़ा है। इनके अलावा शहर में भवनों की संख्या में भी बड़ा इजाफा हो चुका है, लेकिन इनमें से भी अधिकांश भवन टैक्स के दायरे में नहीं आए हैं। यही वजह रही कि नगर निगम के खर्च तो कई गुना तक बढ़ गए, लेकिन आमदनी में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसके लिए शासन ने नगर निगम सीमा में भवनों का जीआईएस (ज्योग्राफिकल इंफॉरमेशन सिस्टम) के जरिए सर्वे कराया है। करीब दो साल से चल रहे इस सर्वे की रिपोर्ट अब आने लगी है। कई वार्डों की सर्वे रिपोर्ट आने के बाद नगर निगम के टैक्स विभाग ने भवनों की नई पैमाइश के आधार पर टैक्स को रिवाइज कर नोटिस भेजने शुरू कर दिए हैं। अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्तीय वर्ष में भवन मालिकों को रिवाइज किया गया टैक्स देना पड़ेगा।
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भवन मालिकों को मिलेगा आपत्ति दर्ज कराने का मौका
निगम के अधिकारियों का कहना है कि नगर निगम अधिनियम-1959 की धारा-213 के तहत दिए जाने वाले इन नोटिस पर लोगों के भवनों की नई एआरवी (एनुअल रेंटल वेल्यू) तय कर इसके आधार पर तय किए गए संपत्ति कर की जानकारी दी गई है। इसमें हुई बढ़ोतरी से अगर भवन मालिक सहमत नहीं है तो वह नगर निगम के जोन कार्यालय में जाकर आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। उनकी आपत्ति पर सुनवाई होगी और उसका निस्तारण किया जाएगा।
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कारपेट एरिया पर टैक्स निर्धारण से भी बढ़ेगा बोझ
नगर निगम ने रिहाइशी भवनों पर कवर्ड एरिया की बजाय अब कारपेट एरिया के आधार पर टैक्स निर्धारण किया है। कवर्ड एरिया के आधार पर टैक्स की न्यूनतम दर 87 पैसे प्रति वर्ग फुट है, जबकि कारपेट एरिया के आधार पर टैक्स की न्यूनतम दर 2.14 रुपये प्रति वर्ग फुट है। इन दोनों दरों से टैक्स निर्धारण में करीब 20 फीसदी का अंतर आ रहा है। इसकी वजह से भी अब रिहाइशी भवनों का टैक्स बढ़ जाएगा। इससे लोगों पर बोझ बढ़ेगा।
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अधिकारी बोले
जीआईएस सर्वे की फाइनल रिपोर्ट में मिली भवनों की पैमाइश के आधार पर नए सिरे से कर निर्धारण कर भवन मालिकों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अगर कोई भवन मालिक इससे असहमत है तो वह इस पर आपत्ति दर्ज करा सकेंगे। उनकी सुनवाई कर निस्तारण किया जाएगा। यह नया हाउस टैक्स अगले वित्तीय वर्ष से लागू होगा। - डॉ. संजीव सिन्हा, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी