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लोन फर्जीवाड़ा में क्लोन चेक हुए इस्तेमाल, होगी फोरेंसिक जांच

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लोन फर्जीवाड़े में क्लोन चेक हुए इस्तेमाल, होगी फोरेंसिक जांच
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गाजियाबाद। चार सौ करोड़ रुपये से अधिक के लोन फर्जीवाड़े में क्लोन चेक का भी इस्तेमाल हुए। एक पीड़ित की चेकबुक के चेक से डेढ़ करोड़ से अधिक का भुगतान होने पर पुलिस ने उसे बुलाया तो यह राज खुला। पीड़ित ने अपनी चेकबुक पुलिस को दिखाई तो उसमें सारे चेक सुरक्षित मिले। पुलिस ने अब क्लोन चेक पर हस्ताक्षरों की पुष्टि करने के लिए फोरेंसिक लैब भेजने का फैसला लिया है। वहीं, पुलिस ने लोन फर्जीवाड़े से खरीदे वाहनों को कुर्क करने के लिए डीएम को रिपोर्ट भेज दी है।
मामला चित्रांश ड्रीम होम प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर संजीव कुमार सक्सेना से जुड़ा है। उन्होंने 3 सितंबर को कविनगर थाने में केस दर्ज कराया था। उनका कहना था कि उनकी कंपनी का ऑफिस आरकेपुरम गोविंदपुरम स्थित चित्रांश सिटी में है। उन्होंने जून 2017 में पीएनबी की चंद्रनगर शाखा से लोन कराया था, लेकिन बैंक के तत्कालीन प्रबंधक रामनाथ मिश्र व अन्य कर्मचारियों ने लोन डेढ़ करोड़ से बढ़ाकर 3 करोड़ कर लिया तथा चेक पर उनके फर्जी हस्ताक्षर कर 14 दिनों के अंदर ही एक करोड़ 60 लाख रुपये निकाल लिए। पता लगने पर वह बैंक गए तो उन्हें खाते की जानकारी भी नहीं दी गई। आरोप है कि 2018 तक खाता ठीक न होने पर उन्होंने बैंक जाकर विरोध जताया। वहां एक महिला ने उन्हें लक्ष्य तंवर से मिलवाया, जिसने बैंक मैनेजर से फोन पर बात कराई। मैनेजर ने कहा कि जो रकम खाते से निकाली है, वह उसे जमा करा देंगे। उन्हें कोई पैसा जमा करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने पैसा जमा नहीं किया, लेकिन बाद में डीएम गौतमबुद्धनगर कार्यालय से सरफेसी का नोटिस आने पर उन्होंने कानून प्रक्रिया अपनाई।
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चेकबुक में एक भी चेक कम नहीं मिला
मामले की जांच कर रही एसआईटी ने संजीव कुमार सक्सेना से उनकी चेकबुक तलब की तो पुलिसकर्मी भी चौंक गए। चेकबुक से एक चेक भी कम नहीं मिला। इसके बाद फर्जीवाड़े में इस्तेमाल चेक से मिलान किया तो वह हूबहू असली चेक जैसा मिला। गौर करने वाली बात यह है कि जिस चेक का इस्तेमाल किया गया, उस नंबर का चेक चेकबुक में मौजूद मिला। एसपी सिटी निपुण अग्रवाल का कहना है कि चेक व अन्य दस्तावेजों को जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा जाएगा, ताकि उस पर हस्ताक्षर करने वाले आरोपी का पता लग सके।
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लक्ष्य, उसकी पत्नी व पिता के नाम रजिस्टर्ड मिले 11 वाहन
गाजियाबाद। लक्ष्य तंवर पर लोन फर्जीवाड़े के 39 केस दर्ज हैं। सभी मामलों की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई थी। एसआईटी ने आरटीओ व रजिस्ट्री विभाग से लक्ष्य, उसके परिजन व मुकदमों में नामजद अन्य आरोपियों की संपत्ति का ब्यौरा मांगा था। आरटीओ विभाग की रिपोर्ट में आरोपियों के नाम 29 वाहन रजिस्टर्ड मिले, जिन्हें कुर्क कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। आरटीओ विभाग से मिले रिकॉर्ड के मुताबिक लक्ष्य तंवर के नाम 3 तथा उसकी पत्नी प्रियंका तंवर व पिता अशोक के नाम 4-4 लग्जरी गाड़ियां रजिस्टर्ड मिलीं हैं। सुनील कुमार के नाम 2, विशेष बहल के नाम 3, दक्ष बग्गा के नाम 4, वरुण त्यागी के नाम 7, सूरज कालरा के नाम 2 वाहन रजिस्टर्ड मिले हैं। 29 वाहनों में से 14 वाहन ऐसे ट्रेस हुए हैं, जो फर्जीवाड़े की रकम से खरीदे गए। इन्हें कुर्क करने के लिए रिपोर्ट भेज दी गई है।
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