दो करोड़ में लगाई हरियाली, जिम्मेदारों ने सुखाई
गाजियाबाद। शहर को हरा-भरा और सुंदर बनाने के लिए जीडीए ने दो करोड़ खर्च कर दिए, लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी ने हरियाली को उजाड़ में तब्दील कर दिया है। बीते 21 महीने में विकसित की गई हरियाली सूख चुकी है। प्राधिकरण ने तीन स्थानों पर आदर्श हरित पट्टियां विकसित कर सुंदर पौधे, लैंड स्केपिंग, घास लगाए थे। अब इन पट्टियों पर गंदगी, बड़ी-बड़ी घास और अतिक्रमण हो चुका है।
16 किमी में हरियाली की दशा खराब
जीडीए ने सबसे पहले 2015 में ठाकुरद्वारा फ्लाईओवर से डासना तक आठ किमी लंबे मार्ग के दोनों ओर आदर्श हरित पट्टी विकसित की थी। इसमें सुंदर बड़े पौधे, पक्षियों की कलाकृतियों वाला ढांचा, पहाड़नुमा आकर्षक लैंड स्केपिंग, घास, खजूर के बड़े पेड़, फूलों के साथ आकर्षक छोटे-बड़े पेेड़ लगाए गए थे। सुरक्षा के लिए हरित पट्टी की फेंसिंग व पानी के छिड़काव को बोरिंग की गई थी, लेकिन अब इस आदर्श हरित पट्टी का हाल बेहाल है।
2018 में राजनगर और कविनगर के दोनों ओर करीब आठ किमी क्षेत्र में विकसित हरित पट्टी की दशा बेहद खराब हो चुकी है। सभी पौधे सूखने के साथ लगाई गई फेंसिंग टूट चुकी है। दोनों हरित पट्टियों पर बड़ी बड़ी घास, गंदगी के ढेर और अतिक्रमण हो चुका है।
रखरखाव को एजेंसी नहीं नियुक्त
हरित पट्टियों के रखरखाव के लिए जीडीए की ओर से हर वित्तीय वर्ष में एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया होती है, लेकिन बीते और चालू वित्तीय वर्ष में प्राधिकरण एजेंसी को नियुक्त नहीं कर पाया। जीडीए ने कई बार निविदा प्रक्रिया निकाली, लेकिन कोरोना के प्रभाव से अक्तूबर 2020 तक कोई एजेंसी आगे नहीं आई। फिर जनवरी 2021 में नियुक्त एजेंसी के फर्जी दस्तावेज जमा करने के कारण दो माह में ही ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। तब से लेकर अब तक कोई एजेंसी नियुक्त नहीं हो सकी है।
निरीक्षण में सिटी फॉरेस्ट में मिली थी गंदगी :
करहेड़ा राजनगर एक्सटेंशन के पास करीब 150 एकड़ में फैले सिटी फॉरेस्ट में जीडीए सचिव के निरीक्षण में तमाम अनियमितताएं मिलीं थीं। निरीक्षण में गंदगी के ढेर के साथ टाइल्स के उखड़े होने, शौचालय गंदे और आरओ खराब पड़े मिले थे। जिस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए व्यवस्थाओं को ठीक कराने के निर्देश दिए गए थे। इस पर अधिकारियों ने अल्पकालीन निविदाएं निकालकर काम कराने की बात कही है।
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विकसित की गई हरित पट्टी एक नजर में
हरित पट्टी खर्च हुए
ठाकुरद्वारा फ्लाईओवर से गोविंदपुरम 1.10 करोड़
गोविंदपुरम से डासना फ्लाईओवर 25 लाख
विवेकानंद फ्लाईओवर से कविनगर-राजनगर 70 लाख
हरित पट्टी की दुर्दशा, टहलने का फुटपाथ गायब
जीडीए ने राजनगर के दोनों ओर विवेकानंद फ्लाईओवर तक आठ किमी में हरित पट्टी विकसित की थी। अब देखरेख नहीं होने से हरित पट्टी की दुर्दशा हो चुकी है। सुंदर पौधे सूखे चुके हैं। हरित पट्टी में टहलने के लिए बनाया गया फुटपाथ पर बड़ी घास खड़ी हुई है। लाखों रुपये की हुई इस बर्बादी में जवाबदेही तय होनी चाहिए।
- अशु वर्मा, पूर्व महापौर
सुंदर हरियाली की जगह खड़ी है बड़ी घास
हरित पट्टियों की खराब दशा के लिए अधिकारियाें की जवाबदेही तय होनी चाहिए। एक ओर पौधरोपण अभियान को बढ़ावा दिया जा रहा है। दूसरी ओर रखरखाव नहीं होना गंभीर मामला है। सुंदर हरियाली की जगह बड़ी घास खड़ी हुई है।
- संदीप, राजनगर निवासी
कई बार की प्रक्रिया, एजेंसी नहीं आई आगे
हरित पट्टियों के रखरखाव के लिए कई बार एजेंसी की नियुक्ति की प्रक्रिया की गई, लेकिन कोई एजेंसी आगे नहीं आई। काम आवंटन होने के बाद एक एजेंसी के ब्लैकलिस्ट होने से काम प्रभावित हुआ। अब एक माह के अंदर प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा। - एसके सिन्हा, मुख्य अभियंता, जीडीए