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हवा के जहर से उखड़ रहीं सांसें, एक महीने में 69 हजार पहुंचे अस्पताल

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हवा के जहर से उखड़ रहीं सांसें, एक महीने में 69 हजार पहुंचे अस्पताल
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गाजियाबाद। हवा में बढ़ता जहर सांसों पर संकट खड़ा कर रहा है। पिछले एक महीने में 69 हजार 295 लोगों को सांस लेने में तकलीफ होने पर अस्पताल जाना पड़ा। 4632 को ऑक्सीजन देने की जरूरत पड़ी। सांस फूलने से 22 मरीजों की मौत हो गई, हालांकि विभाग मौत की पुष्टि नहीं कर रहा है। जिले के सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों पर एक महीने में 137364 मरीज पहुंचे। यह आंकडे़ जिले की चार सीएचसी, जिला एमएमजी और संयुक्त अस्पताल के हैं।
मरीजों की यह संख्या चार से तीस नवंबर तक जिले के चार सीएचसी, जिला एमएमजी और संयुक्त अस्पताल की है। सबसे हैरानी वाली बात यह है कि सिर्फ एमएमजी अस्पताल में तीन फिजिशियन हैं, अन्य किसी भी सरकारी अस्पताल में फिजिशियन और चेस्ट फिजिशियन नहीं हैं। जबकि प्राइवेट अस्पतालों में मात्र 26 चेस्ट फिजिशियन हैं।
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प्रदूषण बढ़ने पर यह गैसों के असंतुलन से फूलने लगती है सांस
प्रदूषण बढ़ने पर ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है। नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, कार्बनमोनो ऑक्साइड, सल्फर ऑक्साइड बढ़ जाती है। ओजोन का स्तर भी बढ़ जाता है। इसके अलावा पीएम 2.5 की मात्रा बढ़ने से सांस के साथ फेफड़ों में पहुंच जाता है, जो बाद में खून में मिल जाता है। इससे सांस की बीमारी के अलावा दिमाग का हैमरेज, बीपी बढ़ने के अलावा हृदयाघात, लकवा, कैंसर का खतरा होता है।
डॉ. आरके गर्ग, चेस्ट फिजिशियन एवं आईएमए अध्यक्ष
पांच से सात मरीज हो रहे भर्ती
सर्दी बढ़ने के बाद नमी बढ़ जाती है तो हवा भारी हो जाती है। इससे प्रदूषण का स्तर नीचे आ जाता है और सांस लेने में परेशानी होने लगती है, क्योंकि लोगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। पांच से सात गंभीर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। कई मरीजों की स्थिति गंभीर होने पर उन्हें रेफर भी करना पड़ता है। नवंबर में यह आंकड़ा अधिक था।
डॉ. आरपी सिंह, वरिष्ठ फिजिशियन एमएमजी अस्पताल
सांस फूलने के साथ ही कैंसर का खतरा
लगातार प्रदूषण के संपर्क में रहने से गंभीर बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। एससीएलसी (स्मॉल सेल लंग कैंसर), एडिनोकार्सिनोमा, स्क्वेमस सेल कार्सिनोमा और लार्ज सेल कार्सिनोमा का खतरा बढ़ जाता है। धमनियों में सूजन आ जाती है जो मौत का कारण भी बन जाती है।
डॉ. केके पांडेय, वरिष्ठ श्वांस एवं क्रिटिकल रोग विशेषज्ञ यशोदा कौशांबी
इस तरह करें बचाव
- सुबह के समय घर से बाहर न निकलें।
- गर्म खाना खाएं और गुनगुना पानी पीएं।
- नियमित योग करें।
- घर से बाहर निकलते समय मास्क जरूर लगाएं।
इनसे बचें
- औद्योगिक क्षेत्र जहां धुआं निकलता हो जाने से बचें।
- धूम्रपान न करें।
- अधिक तली-भुनी चीजों का प्रयोग न करें।
- देर रात जागने से बचें, कम से कम सात घंटे की नींद लें।
अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे कुल मरीज और सांस के मरीज
अस्पताल - नवंबर में ओपीडी - सांस के मरीज - जनवरी से अब तक कुल मरीज
एमएमजी अस्पताल - 43168 - 17267 - 280755
महिला अस्पताल - 9116 - 965 - 60994
संयुक्त अस्पताल - 0000 - 000 58775
मुरादनगर - 11581 - 3474 - 68681
मोदीनगर - 4888- 1955 - 28499
डासना - 4066- 1626 - 54717
लोनी - 14310 - 5724 - 54717
भोजपुर - 5710 -2284 - 33896
नगरीय स्वास्थ्य केंद्र - 28470 - 11388 - 168961
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सांस वाली खबर का जोड़......
दस दिन से थकान महसूस होने के साथ सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। शुरू में लगा की खानपान की अनियमितता के कारण ऐसा है, लेकिन एक रात अचानक नींद खुल गई। सांस लेने में परेशानी हो रही थी। अगले दिन डॉक्टर के पास गई। एक्स-रे के साथ कुछ जांच हुईं डॉक्टर ने बताया कि यह फेफड़ों का संक्रमण है जो प्रदूषण के कारण है।
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मनोजा, साहिबाबाद
दिवाली के बाद खांसी और जुकाम की शिकायत हुई जो लगभग 10 दिनों तक बनी रही। शुरुआत में घरेलू नुस्खे अपनाया, लेकिन आराम नहीं मिला। मेडिकल स्टोर से दवाई ली, इसके बाद भी आराम नहीं मिला तो डॉक्टर को दिखाया। जांच कराने के बाद पता चला कि फेफड़ों में संक्रमण हो गया है। इसलिए सांस लेने में परेशानी हो रही है।
बांके लाल, नंदग्राम
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