पटाखा पर लगी रोक, बेचा या फोड़ा तो जाना पड़ेगा जेल
गाजियाबाद। दिल्ली-एनसीआर के टॉप प्रदूषित शहरों में शामिल गाजियाबाद में सभी तरह के पटाखों की बिक्री और उन्हें फोड़ने पर रोक लगा दी गई है। एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के अनुपालन में डीएम राकेश कुमार सिंह ने सभी उपजिलाधिकारियों और थानाध्यक्षों को पत्र भेजकर निर्देशों का सख्ती से पालन कराने को कहा है। अब पटाखा फोड़ने और बनाने वाले को जेल की हवा खानी पड़ेगी।
हर साल जिले में त्योहारों के सीजन में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक जोन में चला जाता है। दीपावली के आसपास एक्यूआई 500 के पार पहुंच जाता है। हालांकि एनजीटी ने पिछले कई सालों ने धमाकेदार, धुआं युक्त पटाखों को बनाने और फोड़ने पर रोक लगा रखी है। अब दोबारा से पटाखों पर प्रतिबंध का आदेश जारी किया है। डीएम ने बताया कि वायु प्रदूषण नियंत्रण समिति द्वारा प्रदूषण प्रबंधन के संबंध में समय-समय पर निर्देश जारी किए जाते हैं। दीपावली के अवसर पर पटाखों के प्रयोग से होने वाले वायु एवं ध्वनि प्रदूषण से लोगों को काफी दिक्कतें होती हैं। पर्यावरण पर पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, समस्त उप जिलाधिकारियों एवं क्षेत्रीय अधिकारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गाजियाबाद को कोविड-19 महामारी को देखते हुए दीपावली व अन्य पर्वों के दौरान पटाखों के उत्पादन, भंडारण, बिक्री एवं प्रयोग के संबंध में रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
पटाखों के लिए जारी गाइड लाइन
1. सभी तरह के पटाखों पर प्रतिबंध
2. पटाखों के उपयोग से होने वाले कुप्रभाव के बारे जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाए।
3. स्कूल-कॉलेज के छात्रों को पटाखों के कुप्रभाव के बारे में बताएं।
4. संगोष्ठियां, रैलियों, नुक्कड़ नाटक, कार्यशालाओं के माध्यम से आतिशबाजी से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में बताया जाए।
5. पैनी निगाह रखें, डेटा समय से वेबसाइट पर अपलोड करें।
6. एनजीटी के आदेशों और निर्देशों का पालन शत प्रतिशत किया जाए।
7. ग्रीन पटाखों के लिए अनुमति तभी मिलेगी, जब वायु गुणवत्ता में सुधार होगा।
दर्ज कराई एफआईआर
अपर जिलाधिकारी नगर विपिन कुमार ने बताया कि पटाखों की बिक्री करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। गत दिनों सिहानी गेट, कविनगर थाने में अवैध पटाखों को बनाने वालों पर मुकदमा दर्ज कराया गया था। पकड़े गए लोगों को जेल भी भेजा गया था। पटाखा बेचने और फोड़ने वाले को जेल की सजा का प्रावधान है।
पटाखों से नुकसान
पर्यावरण वैज्ञानिक विक्रांत ने बताया कि पटाखों के धुएं से वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ता है। इसके साथ ध्वनि प्रदूषण से सुनने की क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। डॉ. वीपी त्यागी ने बताया कि पटाखों पर तो बिलकुल प्रतिबंध रहना चाहिए। पटाखों के धमाके से कान के पर्दे पर प्रभाव पड़ता है, इससे सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा की शिकायत होती है। हार्ट पर भी प्रभाव पड़ता है। पटाखे के धुएं से दमा मरीजों को बहुत दिक्कत होती है। सांस रोगी के मरीजों के लिए पटाखे का धुआं जहर से कम नहीं है। आम लोगों को भी आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत होती है।