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14 किलोमीटर में ३५ जगह धंस गया दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे

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14 किलोमीटर में 35 जगह पर धंस गया दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे
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गाजियाबाद। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे बन जाने के बाद दिल्ली से मेरठ पहुंचने का समय तो कम हो गया, लेकिन सफर सुहाना नहीं हुआ। 8340 करोड़ से बना एक्सप्रेसवे 14 किलोमीटर की दूरी में 35 जगहों पर धंस गया है। कई जगह एनएचएआई (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) ने मरम्मत की, लेकिन कुछ दिन बाद सड़क फिर धंस गई। अब जगह-जगह बेरिकेडिंग लगाकर मरम्मत का काम किया जा रहा है। इससे ट्रैफिक प्रभावित हो रहा है। हादसे का भी डर रहता है।
अप्रैल में एनएचएआई ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे को वाहनों के लिए खोला था। तब से लेकर बरसात शुरू होने तक इसका सफर बेहद सुहाना रहा। बरसात के सीजन में इस एक्सप्रेसवे की हालत खराब होने लगी। करीब डेढ़ महीना पहले ही एक्सप्रेसवे की मिट्टी जगह-जगह से धंसनी शुरू हो गई। इसकी वजह से सड़क खोखली हो गई। अब तक करीब 50 से ज्यादा स्थानों पर मिट्टी धंसने की वजह से सड़क टूट चुकी हैं। एनएचएआई ने इन प्रभावित स्थानों पर बेरिकेडिंग करा दी है। कई स्थानों पर मेेंटेनेंस का काम भी शुरू कर दिया गया है, लेकिन बरसात की वजह से बाधित हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि मिट्टी का कांपेक्शन ठीक से न होने की वजह से ऐसी दिक्कतें आती हैं।
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अब बनाए जा रहे ड्रेन, कटान रोकने को पिचिंग स्टोन
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर जहां बरसात का पानी ठहरता है, उनमें से अधिकांश स्थानों पर ड्रेेनेज की व्यवस्था नहीं थी। इसकी वजह से पानी इकट्ठा हो गया और धीरे-धीरे रिसकर सड़क के नीचे मिट्टी पर पहुंच गया। इसकी वजह से मिट्टी धंस गई। अब एनएचएआई ने ऐसे स्थानों पर सड़क के बगल में जल निकासी के लिए ड्रेेनेज बनाने शुरू किए हैं। जिन स्थानों पर सड़क किनारे की मिट्टी को खाली छोड़ दिया गया था, वहां अब पिचिंग स्टोन लगाए जा रहे हैं, ताकि कटान न हो।
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पेरिफेरल पर जाने वाले वाहनों का आधा रास्ता रुका
पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के पास करीब 100 मीटर लंबी सड़क के साइड की मिट्टी खिसक गई है। यहां एक लेन को बेरिकेडिंग लगाकर पूरी तरह रोक दिया गया है। इसकी वजह से मेरठ की ओर से पलवल की ओर जाने वाले वाहन चालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। क्षतिग्रस्त सड़क की वजह से यहां रास्ता संकरा हो गया।
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सड़क के बीच जमा हो रहा पानी, हो सकता है हादसा
डासना से मसूरी गंगनहर के बीच दो स्थान पर सड़क का लेवल खराब है। यहां बरसात का पानी रुकता है। शुक्रवार को बरसात के दौरान यहां पानी जमा हो गया। तेज रफ्तार वाहनों के आवागमन से इस पानी की फुहार करीब 7-8 फीट ऊंची उठ जाती हैं। इससे बगल से गुजरने वाले वाहन चालकों का ध्यान भटकता है और हादसे की वजह बन सकता है।
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कोट
एक्सप्रेसवे पर कई बार सफर किया है। इसके धंसने की वजह मिट्टी का कांपेक्शन सही नहीं होना है। सड़क बनाने से पहले मिट्टी को ठीक से दबाया नहीं गया है। खोखली मिट्टी में पानी जाने की वजह से वह दब रही है। इसके अलावा पूरे एक्सप्रेसवे पर मानकों के अनुरूप ड्रेेनेज नहीं बनाया गया। सड़क पर जमा पानी धीरे-धीरे परकुलेट होकर मिट्टी तक पहुंच रहा है। - आरके मित्तल, रिटा. चीफ इंजीनियर, नगर निगम
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अधिकारी बोले
पहली बारिश में अक्सर ऐसी दिक्कतें आ जाती है। सड़क निर्माण के लिए जमीन भी टुकड़ों में मिली थी, जिससे इस पर काम करने के लिए समय कम मिला। जिन स्थानों पर मिट्टी धंसी है, उन्हें रिपेयर कराया जा रहा है। बारिश का सीजन खत्म होने के 10 दिन के अंदर पूरे सभी प्वाइंट पर रिपेयरिंग पूरी हो जाएगी। - मुदित गर्ग, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
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