तुलसी निकेतन में हो सकता है श्मशान घाट जैसा हादसा
गाजियाबाद। दिल्ली की सीमा से सटे भोपुरा बॉर्डर क्षेत्र पर बसी तुलसी निकेतन कॉलोनी को खाली कराने के लिए जीडीए ने एक बार फिर प्रयास शुरू कर दिए हैं। इस बार जीडीए ने मुरादनगर श्मशान घाट हादसे का जिक्र करते हुए तुलसी निकेतन के जर्जर फ्लैट खाली कराने के लिए नगर निगम को पत्र भेजा है। नगर निगम अधिनियम-1959 में जर्जर भवनों को खाली कराने का नगर निगम को अधिकार होने का हवाला देकर जीडीए अधिकारी कार्रवाई कराना चाहते हैं। हालांकि इस बड़ी आबादी वाले क्षेत्र में कार्रवाई करने से नगर निगम भी फिलहाल हाथ पीछे खींच रहा है।
जीडीए की ओर से बसाई गई तुलसी निकेतन कॉलोनी के बने ईडब्ल्यूएस, एलआईजी भवन और दुकानें जर्जर हो चुकी हैं। जीडीए की ओर से पूर्व में जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के विशेषज्ञों से इन भवनों की जांच कराई गई थी। एक्सपर्ट्स ने रिपोर्ट दी थी कि इस कॉलोनी के सभी भवन अत्यधिक जर्जर हालत में हैं और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। जीडीए की ओर से तुलसी निकेतन के आवंटियों को मकान खाली करने और यहां मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव दिया था। इन आवंटियों को बहुमंजिला इमारतों में मकान दिए जाने की योजना भी बनाई गई थी, लेकिन आवंटियों ने इस प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया था। लंबे समय बाद भी जीडीए की यह कवायद अंजाम तक नहीं पहुंच पाई थी।
अब मुरादनगर श्मशानघाट में हुए हादसे के बाद अब जीडीए ने नगर निगम को पत्र भेजकर तुलसी निकेतन के जर्जर भवन खाली कराए जाने की मांग की है। जीडीए ने बीते दिनों तीसरी बार नगर निगम को रिमाइंडर भेजा है। वहीं नगर निग म के अधिकारियों ने तुलसी निकेतन कॉलोनी नगर निगम को हस्तांतरित न होने की बात कहकर कार्रवाई करने में असमर्थता जता दी है। मुख्य अभियंता जीडीए विवेकानंद सिंह ने कहा कि नगर निगम अधिनियम में जर्जर भवनों को खाली कराने का अधिकार निगम को दिया गया है। इसी आधार पर निगम को पूर्व में पत्र भेजा गया था। अब इसका रिमाइंडर भेजकर मकान खाली कराने को कहा गया है।