राजनगर-कविनगर जैसे दर्जनों पॉश इलाकों में दोगुना होगा हाउस टैक्स
गाजियाबाद। अब कविनगर, राजनगर, नेहरू नगर जैसी अन्य पॉश कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को हाउस टैक्स पहले से ज्यादा चुकाना होगा। नगर निगम ने संपत्तिकर नियमावली 2000 को गाजियाबाद में भी लागू करने का निर्णय लिया है। इस नई नियमावली के तहत अब लोगों को डीएम सर्किल रेट में तय किए गए किराया दर के आधार पर टैक्स चुकाना होगा। हालांकि इस नियमावली के लागू होने के बाद माता कालोनी, रोजी कॉलोनी जैसी कम सुविधाएं वाली कॉलोनियों के लोगों को पॉश कॉलोनियों के बराबर हाउस टैक्स नहीं देना होगा, लेकिन टैक्स का बोझ उन पर भी बढ़ जाएगा।
नगर निगम इस नई टैक्स नियमावली को लागू करने से पहले लोगों से आपत्तियां मांग रहा है। 20 फरवरी तक लोग इस पॉलिसी को समझकर आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। आपत्तियों का निस्तारण करने के बाद नगर निगम के अधिकारी इस पॉलिसी को सदन में पेश करेंगे। सदन से मंजूरी के बाद ही पॉलिसी को लागू किया जा सकेगा। नगर निगम अभी तक जहां कारपेट एरिया के हिसाब से अधिकतम 1.90 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से हाउस टैक्स वसूलता है, वहीं नई पॉलिसी के तहत टैक्स की अधिकतम दर 4 रुपये प्रति वर्ग फुट प्रस्तावित की गई है। इसके लिए नगर निगम ने कॉलोनियों को ए,बी व सी श्रेणी में बांटा है। यानी कविनगर और राजनगर जैसी पॉश कॉलोनियों में हाउस टैक्स सबसे ज्यादा बढ़ेगा। यहां करीब दोगुना हाउस टैक्स हो जाएगा। कई अन्य कॉलोनियों में भी हाउस टैक्स का बोझ 50 से 60 फीसदी तक बढ़ जाएगा।
खाली प्लॉट पर भी देना होगा हाउस टैक्स
नगर निगम ने नई टैक्स पॉलिसी में खाली प्लॉट पर भी टैक्स लेने का प्रावधान किया है। इसके तहत प्लॉट मालिकों को 30 पैसे प्रति वर्ग फुट से लेकर 1.75 रुपये प्रति वर्ग फुट तक टैक्स देना पड़ सकता है। इन प्लॉटों को भी नगर निगम ने तीन श्रेणी में बांटा है। 12 मीटर से कम चौड़े मार्ग पर स्थित प्लॉट पर सबसे कम और 24 मीटर से ज्यादा चौड़े मार्ग पर स्थित प्लॉट पर सबसे ज्यादा टैक्स लगाया जाएगा। अभी तक नगर निगम खाली प्लॉट से टैक्स नहीं वसूलता है। हालांकि इसका प्रावधान निगम एक्ट में पहले से है।
ए श्रेणी में रखी गई प्रमुख कॉलोनियां
राजनगर, कविनगर, राजनगर एक्सटेंशन, शास्त्री नगर, वसुंधरा, वैशाली, चिरंजीव विहार, अवंतिका, इंदिरापुरम, नवयुग मार्केट, पार्श्वनाथ पैराडाइज, गोविंदपुरम, विवेकानंद नगर, लोहा मंडी, कविनगर औद्योगिक क्षेत्र, कमला नेहरू नगर, संजय नगर सेक्टर-23, लोहिया नगर, कौशांबी, शालीमार गार्डन, राजेंद्र नगर, श्यामपार्क एक्सटेंशन, गांधी नगर, तुराबनगर, सूर्यनगर, रामपुरी, रामप्रस्थ, चंद्रनगर, शिप्रा सनसिटी, मॉडल टाउन, नेहरू नगर, आदित्य वर्ल्ड सिटी, कर्पूरीपुरम, स्वर्णजयंती पुरम, क्रॉसिंग रिपब्लिक, सीमांत विहार, बाग वाली कॉलोनी, पटेल नगर, विजयनगर से.-9 एच, जे व के ब्लॉक आदि।
बी श्रेणी में रखी गई कॉलोनियां
पुराना विजयनगर, सेक्टर-12 स्थित ए, बी, सी व डी ब्लॉक, नंदग्राम ए, सी, डी, ई ब्लॉक, साईं एंकलेव, लक्ष्मी विहार, मालीवाड़ा, डासना गेट, हरदेव सहाय, सर्वोदय नगर, हिंडन विहार, मुकुंदनगर, बौंझा, पटेल मार्ग, पंचवटी, अंबेडकर नगर, सुंदरपुरी, भूड़ भारत नगर, डूंडाहेड़ा, सैन विहार, डिफेंस कॉलोनी, कृष्णा गार्डन, कैलाश पुरम, बालाजी एंकलेव, आंशिक राकेश मार्ग, एमपी एंकलेव, बैंक एंकलेव, महिंद्रा एंकलेव, कोटगांव, आर्य नगर, मवई, शिवपुरी, नई बस्ती, दिल्ली गेट, पुरानी तहसील, चंद्रपुरी, श्यामपार्क मेन, राजेंद्र नगर औ.क्षेत्र, वसुंधरा सेक्टर-2ए वैंबे योजना, आरके पुरम, शताब्दी पुरम, ब्रजविहार, लाल क्वार्टर, वृंदावन गार्डन, जनकपुरी, वैशाली सेक्टर-1 कामना अपार्टमेंट, लाजपतनगर, वैशाली सेक्टर-3 एफ, सेक्टर-2 के कई ब्लॉक, न्याय खंड-3 आदि।
सी श्रेणी में रखी गई कॉलोनियां
कृष्णा नगर, बागू, भीमनगर, सिद्धार्थ विहार, राहुल विहार, माता कॉलोनी, रोजी कॉलोनी, संघर्ष कॉलोनी, गगन विहार, विकलांग कॉलोनी, सुदामापुरी, बारादरी, दीनागढ़ी, प्राण गढ़ी, रामागढ़ी, शिब्बनपुरा, पप्पू कॉलोनी, दीनदयालपुरी, उत्तरांचल नगर, बालूपुरा, कालकागढ़ी, प्रेमपुरी, पच्छादान, जटवाड़ा, कांजीमल, पक्की सराय, कस्साबान, सुक्खीमल, घूकना, चरण सिंह कॉलोनी, सिकरोड, गढ़ी, मोरटा, मिलक, दुहाई, सेवानगर, रजापुर गांव, भोपुरा, तुलसी निकेतन, राजीव नगर, भोवापुर, लोहारपुरा, दौलतपुरा, जयप्रकाश नगर, कैलाश नगर, कैला खेड़ा, नायफल, बयाना, काजीपुरा, महरौली, शंकर विहार, माधोपुरा, गऊपुरी, राजीव कॉलोनी, कृष्णा विहार कुटी, सदरपुर गांव, सिहानी, हरवंश नगर, सरायनजर अली, नसरतपुरा, शहीदनगर, प्रह्लादगढ़ी, छाबड़ा कॉलोनी, नासिपुर, साहिबाबाद, झंडापुर, शाहपुर, बम्हेटा, कड़कड़ मॉडल, करहेड़ा आदि।
नगरायुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने कहा नई संपत्ति कर नियमावली के तहत लखनऊ, कानपुर समेत कई शहरों में टैक्स निर्धारण पहले ही हो चुका है। गाजियाबाद में इस नियमावली को लागू किया जा रहा है। इसके लिए विज्ञापन जारी कर आपत्तियां मांगी गई हैं। 20 फरवरी तक मिलने वाली आपत्तियों की सुनवाई कर निस्तारण किया जाएगा। इसके बाद अग्रिम प्रक्रिया को पूरा कर नए वित्तीय वर्ष में इस नियमावली को लागू किया जाएगा।