इंजेक्शन-ऑक्सीजन के नाम पर ठगने वाले गैंग तक पहुंची पुलिस
गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण के समय लोगों की मजबूरियों का फायदा उठाकर ठगी करने वाले गैंग तक पुलिस के हाथ पहुंच चुके हैं। यह गैंग जरूरतमंद लोगों को ऑक्सीजन, इंजेक्शन व वेंटिलेटरयुक्त बेड दिलाने के नाम पर ठगी करता था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कुछ संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जा रही है। उनसे कुछ अहम सुराग मिले हैं। जल्द ही गिरोह में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
पुलिस के मुताबिक बीते दिनों सोशल मीडिया पर ऑक्सीजन सिलिंडर व वेंटिलेटरयुक्त बेड दिलाने के संबंध में तमाम मेसेज वायरल हुए थे। उनमें मोबाइल नंबर भी दिए हुए थे। इसके अलावा कुछ मामले ऐसे भी सामने आए, जिनमें लोगों ने इंटरनेट पर मौजूद नामचीन अस्पतालों की वेबसाइट या टोल फ्री नंबर पर कॉल की तो उन्हें डॉक्टर का नंबर दिया गया। असलियत में वह नंबर डॉक्टर नहीं, बल्कि साइबर अपराधियों का था। डॉक्टर व अस्पतालकर्मी बनकर अस्पताल में बेड, जीवन रक्षक इंजेक्शन, ऑक्सीजन व एंबुलेंस देने के नाम पर साइबर अपराधियों ने कई लोगों से लाखों रुपये की ठगी की। एक के बाद एक कई मामले सामने आने के बाद पुलिस मामले की पड़ताल में जुटी तो कई अलग-अलग मेसेज में एक ही नंबर मिला। पुलिस उन्हें ट्रैक करते हुए संदिग्ध आरोपियों तक पहुंच गई।
इंटरनेट पर डाल रखे थे फर्जी आईडी के नंबर
पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने इंटरनेट पर नामी अस्पतालों के नाम से अपने नंबर डाल दिए। लोग उन्हें फोन करते तो वह स्वास्थ्य सेवाएं देने के बदले एडवांस के नाम पर खाते में रकम ट्रांसफर करा लेते। रकम खाते में आते ही आरोपी मोबाइल पर बात करनी बंद कर देते या फिर कॉल रिसीव नहीं करते थे। पुलिस के मुताबिक यह सभी नंबर फर्जी आईडी पर लिए हुए थे।
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फर्जी आईडी पर सिम मुहैया कराने वाला रडार पर
बताया जा रहा है कि गिरोह को फर्जी आईडी पर सिम मुहैया कराने वाला आरोपी भी पुलिस के रडार पर आ चुका है। गिरोह में शामिल हर सदस्य की अलग-अलग जिम्मेदारी थी। थोड़ा बहुत अंग्रेजी बोलने वाले सदस्य को डॉक्टर बनाकर पेश किया जाता था। गिरोह में शामिल एक आरोपी पूर्व में भी बैंकिंग फ्रॉड के मामले में जेल जा चुका है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही गैंग के संचालक, सरगना और सदस्यों तक पहुंचकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।