गाजियाबाद। गाजियाबाद का नाम बदलकर जल्द ही गजप्रस्थ हो सकता है। इस नए नाम का चुनाव प्रशासन के अधिकारियों ने आपसी विचार-विमर्श के बाद किया है। इस नाम के प्रस्ताव को अब शासन के पास भेजा जाएगा। नाम बदलने या न बदलने का निर्णय शासन से ही होना है। इससे पहले नगर निगम बोर्ड ने इसका प्रस्ताव पास किया था। हालांकि, बोर्ड ने तीन नाम सुझाए थे। ये हैं गजप्रस्थ, दूधेश्वरनगर और हरनंदीपुरम।
इनमें से प्रशासन ने गजप्रस्थ का चयन किया है। डीएम इंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि गजप्रस्थ नाम रखे जाने का प्रस्ताव भेजे जाने से पहले इस पर काफी काम किया जाना है। इसके संबंध में साक्ष्य जुटाए जाएंगे। ये साक्ष्य प्रमाणिक होने चाहिए। साक्ष्य मजबूत होंगे तो गाजियाबाद का नाम गजप्रस्थ रखे जाने में कोई अड़चन नहीं आएगी।
नगर निगम की ओर से दिए गए तीन नाम से एक दूधेश्वरनगर है। इसे दूधेश्वरनाथ मंदिर के नाम पर चुना गया। पौराणिक दूधेश्वरनाथ मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक है। हरनंदीपुरम नाम हरनंदी यानी हिंडन से आया। शास्त्रों में हिंडन का नाम हरनंदी और पंचतीर्थी कहा गया है। तीसरा नाम गजप्रस्थ ही है।
इसका प्रस्ताव इसलिए रखा गया क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि द्वापर युग में इस क्षेत्र का नाम गजप्रस्थ ही था। उस समय दिल्ली को इंद्रप्रस्थ कहा जाता था। दिल्ली के नजदीक के इस क्षेत्र में हाथी रखे जाते थे। हाथी यानी गज की वजह से ही क्षेत्र का नाम गजप्रस्थ था। प्रशासन ने तीन में से इसी नाम का चयन किया है। हालांकि, कई लोगों ने और भी नाम सुझाए लेकिन चर्चा में तीन ही ज्यादा रहे। जिले का नाम बदलने के लिए लंबे समय से आंदोलन कर रहे संदीप त्यागी का कहना है कि गजप्रस्थ नाम ही रखा जाना चाहिए।
मुगलकाल में रखा गया
था गाजियाबाद नाम
इतिहासकार कहते हैं कि मुगलकाल में इस क्षेत्र को गाजियाबाद नाम मिला। यह नाम मुगल शासन के वजीर गाजीउद्दीन के नाम पर पड़ा। गाजीउद्दीन के समय में 1740 में यहां चार गेट बनाए गए। चारों गेट के बीच में शहर की आबादी थी। शहर का नाम था गाजीउद्दीननगर। अंग्रेजों के समय में रेलवे लाइन खुलने के बाद इसका नाम छोटा करके गाजियाबाद कर दिया गया। तब से यही चला आ रहा है। 14 नवंबर 1976 को तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने गाजियाबाद को जिला घोषित किया। इससे पहले यह मेरठ जिले की तहसील था। जिला बनाने के बाद भी गाजियाबाद का नाम नहीं बदला गया।
और भी जिलों से उठ रही मांग
जिले का नाम बदले जाने की मांग सिर्फ गाजियाबाद से नहीं उठ रही। और भी जिले इसमें शामिल हैं। जैसे आजमगढ़ को आर्यमगढ़, मैनपुरी को मयनपुरी, संभल को कल्किनगर, देवबंद को देववृंदपुर, आगरा को अग्रवन और अलीगढ़ का नाम हरिगढ़ किए जाने की मांग भी समय-समय पर उठती रहती है। भाजपा सरकार इलाहबाद का नाम प्रयागराज और फैजाबाद का अयोध्या कर चुकी है।