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नौ साल से नाम-पता बदलकर फरारी काट रहा था 25 हजार का इनामी, गिरफ्तार

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नौ साल से नाम-पता बदलकर फरारी काट रहा था 25 हजार का इनामी, गिरफ्तार
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साहिबाबाद। दिल्ली-एनसीआर में पांच बार नाम और पते बदलकर नौ साल से फरारी काट रहे 25 हजार के इनामी बदमाश बिसौली बदायूं निवासी अमित को अपराध शाखा ने कौशांबी से गिरफ्तार किया है। वह 2013 में जेल से पैरोल पर छूटने के बाद लिंक रोड थाना क्षेत्र से वांछित चल रहा था। पुलिस पूछताछ में उसने बताया कि वह क्रॉसिंग रिपब्लिक सोसायटी में नोएडा की तरफ किराने की दुकान चला रहा था।
अपराध शाखा के प्रभारी निरीक्षक अब्दुर रहमान सिद्दीकी ने बताया कि अमित चोरी के वाहनों के फर्जी कागजात तैयार करके उन्हें लोगों को बेच देता था। वह वाहन चोरी करने वाले गिरोह के संपर्क में रहता था और लोगों को लाखों रुपये का चूना लगा चुका था। वर्ष 2014 में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। करीब 40 दिन जेल में रहने के बाद वह पैरोल पर छूटा था। इसके बाद वह फरार हो गया। करीब नौ साल तक वह अलग-अलग जगह पर कभी इलेक्ट्रिशियन, कभी फेरी वाला बनकर पुलिस से छुप रहा था। इन नौ वर्षों में उसने रमेश, रामू, नरेश और जितेंद्र नाम रखे थे। अभी हाल ही में वह क्रासिंग रिपब्लिक सोसायटी में दीपक बनकर किराने की दुकान चला रहा था। लिंकरोड थाना पुलिस और अपराध शाखा टीम उसकी जगह-जगह तलाश के लिए दबिश दे रही थी। वर्ष 2015 में तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने उस पर 5000 रुपये का इनाम घोषित किया था। इस बीच लिंकरोड पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई कर थी। वर्ष 2018 में एसएसपी ने इनाम की राशि बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी। फरारी की वजह से उसने पैतृक गांव से भी नाता तोड़ दिया था। अपराध शाखा ने उसे कौशांबी बस डिपो के पास से कार समेत गिरफ्तार कर लिया। वह किसी साथी को लेने के लिए आया था।
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अलीगढ़, दिल्ली और नोएडा में बना था सीए का मुंशी
पूछताछ में सामने आया कि अमित अलीगढ़, दिल्ली और नोएडा में कई चार्टर्ड अकाउंटेंट का मुंशी भी बना था। इस दौरान उसे वहां रहने और खाने-पीने की भी व्यवस्था मिलती थी। पुलिस से बचने के लिए वह कमरे से ज्यादा समय के लिए बाहर नहीं निकलता था। इस बीच सीए के कार्यालय में रहकर उनका सहयोग करता था।
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पुलिस वेरिफिकेशन कराया होता तो पकड़ा जाता
इस मामले में उन लोगों की लापरवाही भी सामने आई है, जिन्होंने नौ साल तक अमित को अपने घर या कार्यालय में पनाह दी। अपराध शाखा की जांच में सामने आया है कि किसी भी जनपद में अमित का पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया गया था। वह कभी दाढ़ी-मूंछ बढ़ा लेता था तो कभी फटे कपड़े पहनकर बेसहारा बन जाता था।
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