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दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कोरिडोर के लिए सड़क किनारे 35 दुकानों को तोड़ा

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दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कोरिडोर के लिए सड़क किनारे 35 दुकानों को तोड़ा
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लोनी। दिल्ली देहरादून इकोनॉमिक कोरिडोर के लिए प्रशासन ने बृहस्पतिवार को पुश्ता पुलिस चौकी के सामने दिल्ली-सहारनपुर मार्ग पर बनीं करीब 35 दुकानों को तोड़ दिया। दुकान तोड़ने से पहले अधिकारियों ने दुकानदारों से सामान हटाने को कहा। मुआवजा नहीं उठाने वाले कुछ दुकानदारों ने विरोध किया तो उन्हें पुलिस चौकी में बैठा गया। दुकानदारों ने कोर्ट जाने की बात कही है।
प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक दिल्ली देहरादून इकोनॉमिक कोरिडोर का काम चल रहा है। दिल्ली से खजुरी पुश्ता मार्ग होते हुए ट्रॉनिका सिटी से बागपत की ओर देहरादून मार्ग का निर्माण किया जा रहा है। इसके तहत पुश्ता पुलिस चौकी के पास 35 दुकानदारों को तोड़ना था। इससे पहले इन दुकानदारों को मुआवजा दिया गया है। बृहस्पतिवार को लोनी एसडीएम संतोष कुमार राय पुलिस बल के साथ पहुंचे। एसडीएम ने बताया कि कुछ दुकानदारों को समय दिया गया था कि अपना सामान हटा ले। इसके बाद टीम ने जेसीबी से 35 दुकानों को ध्वस्त किया है। इस कार्रवाई के दौरान कुछ दुकानदारों ने विरोध किया। दुकानदारों का कहना था कि उन्हें मुआवजा उचित नहीं दिया गया है। उन्होंने मुआवजा उठाया भी नहीं है लेकिन प्रशासन ने विरोध के बीच अपनी कार्रवाई को नहीं रोका।
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70 लाख रुपये की ली जमीन, सात लाख मुआवजा मिल रहा
बागपत के घिटोरा गांव में रहने वाले पप्पू ने बताया कि उन्होंने करीब पांच साल पहले पुश्ता पुलिस चौकी के पास 100 गज से अधिक की जमीन करीब 70 लाख रुपये बाजार भाव से खरीदी थी। उन्होंने 20 लाख रुपये उसे बनाने में लगाया। तीन दुकानें और तीन मंजिल का मकान बनाया था लेकिन प्रशासन ने उन्हें करीब सात लाख रुपये का मुआवजा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने जमीन ली थी तब उन्होंने इतने का तो स्टांप खरीदा था। उन्होंने कहा कि उन्होंने जब प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया, तो पुलिस चौकी में उन्हें बैठा दिया। उन्होंने कहा वह और अन्य दुकानदार कोर्ट का सहारा लेंगे। अन्य दुकानदारों को भी कृषि भूमि के रेट से मुआवजा दिया गया है जबकि यह आबादी वाला इलाका है। यह जमीन कमर्शियल एरिए में आती है। उन्होंने अधिकारियों से लगातार गुहार लगाई लेकिन किसी ने नहीं सुनी। अब उनका परिवार सड़क पर आ गया है। उन्होंने पांच साल पहले अपनी सारी जमा पूंजी इस जमीन को खरीदने में लगा दी थी।
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