हर पल सिर पर मंडरा रहा था मौत का साया
साहिबाबाद। दिल्ली के अर्जुन नगर निवासी एमबीबीएस छात्रा श्वेता ने कीव में तबाही को जो मंजर देखा, वह जहन से नहीं जा रहा। मौत साये की तरह सिर पर मंडरा रही थी। 26 फरवरी की रात ढाई बजे उनके हॉस्टल से तीन किमी दूर रूसी सैनिक बमबारी कर रहे थे। जगह-जगह आग के गोले धधक रहे थे। माइनस दो डिग्री तापमान में उन्हें अचानक हॉस्टल छोड़ना पड़ा।
रात करीब डेढ़ बजे सी-17 ग्लोबामास्टर से उतरने के बाद वायुसेना के जवानों ने छात्र-छात्राओं को एयरबेस कैंप में बैठा दिया। वहां उन्हें नाश्ता-पानी देने के बाद कागजी प्रक्रिया की गई। इस बीच कोई छात्र परिवार से फोन पर बात कर रहा था कोई एक दूसरे से यूक्रेन के हालात पर चर्चा कर रहा था। प्रशासन के अधिकारी भी उनका हौसला बढ़ा रहे थे। उसी बीच केरल की छात्रा अंजू की आंखों से आंसू छलकने लगे तो प्रशासनिक अधिकारियों और वायुसेना की महिला जवान ने उनके आंसू पोंछकर शांत कराया। वहीं, केरल के एक ग्रुप ने वतन वापसी की खुशी को विक्ट्री बनाकर प्रदर्शित किया। राजस्थान की महिला एवं बाल विकास विभाग (स्वतंत्र प्रभार) मंत्री ममता भूपेश ने भी छात्र-छात्राओं का हौसला बढ़ाया। कहा कि प्रदेश के छात्र-छात्राओं को पूरी सुविधा दी जाएगी। सदमे से उभरने के लिए इनकी काउंसलिंग भी कराई जाएगी।
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दस आदमी के लिए एक थाली में मिला था खाना:
मैं दिसंबर में यूक्रेन गया था। कीव में जब हमला शुरू हुआ तो सभी दोस्तों ने विश्वविद्यालय छोड़ दिया। एक बस बुक करके बॉर्डर के पास तक पहुंचे। लेकिन वहां पांच-पांच लोगों को बॉर्डर पार करा रहे थे। जिस शेल्टर में रुके थे, वहां पर दस-दस लोगों का एक थाली में खाना दे रहे थे। अब दोबारा जाने के बारे में सोचना पड़ेगा। अनिल- चुरु, राजस्थान
तिरंगा लगाया, तभी हुई घर वापसी:
विश्वविद्यालय छोड़ने के बाद हम 50 किमी तक पैदल चले। एक शेल्टर होम के पास बस खड़ी थी। चालक से बात की तो उसने एक छात्र से 20-30 हजार रुपये किराया वसूल किया। रास्ते में कोई न रोके इसके लिए हम लोगों ने बस पर तिरंगा लगा दिया था। उसके बाद रूस और यूक्रेन की सेना व अधिकारियों ने कहीं नहीं रोका। अब युद्ध रुकेगा तो परिवार से बात करके ही यूक्रेन जाना होगा। अरविंद-राजस्थान
डिग्री मिलेगी या नहीं भविष्य की हो रही चिंता :
माता-पिता का सपना पूरा करने के लिए यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गई थी। कभी सोचा नहीं था कि इस तरह के हालात देखने को मिलेंगे। यह माहौल कभी नहीं भुला पाउंगी। वो अब जहन में बैठ गया है। वहां के बारे में सोचती हूं तो रूह कांप जाती है। लेकिन अब डिग्री मिलेगी भी या नहीं यही चिंता सता रही है। अक्षिता- यमुना नगर हरियाणा