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चार करोड़ खर्च, पिकनिक स्पॉट नहीं बन पाया व्हीकल फ्री जोन

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चार करोड़ खर्च, पिकनिक स्पॉट नहीं बन पाया व्हीकल फ्री जोन
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गाजियाबाद। महानगर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र राजनगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर (आरडीसी) में चार करोड़ खर्च कर विकसित किए गए व्हीकल फ्री जोन को नया पिकनिक स्पॉट बनाने की योजना फेल साबित हुई है। प्रोजेक्ट को पूरा हुए एक साल बीतने के बावजूद खाने-पीने और खरीदारी से जुड़े बनाए गए 10 बड़े क्योस्क का संचालन शुरू नहीं हो पाया है। दूसरी ओर व्हीकल फ्री जोन में सफाई सहित अन्य सुविधाओं का हाल बेहाल है। 59 लाख में क्योस्क का आवंटन हासिल करने वाले ठेकेदार रविंद्र झा की अप्रैल में कोरोना से मौत हो गई थी, लेकिन छह माह बीतने के बावजूद अब तक नए सिरे से क्योस्क व जोन का आवंटन नहीं हो सका है।
आवंटन तो दूर अवैध रूप से क्योस्क संचालन की होगी जांच
आरडीसी गौड़ मॉल रोड पर दुबई मॉल के सामने बने व्हीकल फ्री जोन में बड़े क्योस्क बनाए गए। इनका क्षेत्रफल 334.58 वर्ग मीटर है। करोड़ों के प्रोजेक्ट का उद्घाटन केंद्रीय राज्यमंत्री वीके सिंह ने किया। आवंटन होने के दो से ढाई माह के अंदर कब्जा लेकर व्हीकल फ्री-जोन में सभी सुविधाओं को शुरू किया जाना था, लेकिन पहले आवंटी की मौत के बाद नए सिरे से आवंटन प्रक्रिया शुरू करना जीडीए अधिकारी भूल गए। क्योस्क में अवैध रूप से दुकानों के संचालन का मामला तूल पकड़ने के बाद संबंधित अभियंत्रण जोन के अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
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सालाना 25 लाख का जीडीए को नुकसान
जीडीए अधिकारियों के लचर रवैए से क्योस्क का आवंटन अब तक नहीं हो पाया है। क्योस्क से प्राधिकरण को सालाना 20 लाख से अधिक की आय होनी थी। दूसरी ओर व्हीकल फ्री जोन व क्योस्क का संचालन का जिम्मा लेने वाली एजेंसी को ही पूरे क्षेत्र का मेंटेनेंस और बिजली का खर्च भरना था। ऐसे में रखरखाव खर्च को अगर मिला दें तो जीडीए को करीब 25 लाख का अब तक नुकसान हुआ है।
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जोन में गंदगी के ढेर, फव्वारे भी बंद
आरडीसी में दो मॉल, नामी रेस्टोरेंट के साथ कई नेशनल और मल्टीनेशनल कंपनियों के शोरूम हैं। यहां रोजाना कामकाज के अलावा खरीदारी के लिए 10 से 15 हजार लोग पहुंचते हैं। सप्ताह के आखिर में लोगों की भीड़ का आंकड़ा 15 हजार को भी पार कर जाता है। ऐसे में वर्तमान में आवंटन व रखरखाव नहीं होने से क्षेत्र में गंदगी के ढेर देखे जा सकते हैं। सभी फव्वारे बंद है। सफाई नहीं होने से लगाई गई पत्थरों की बेंच पर धूल जमा है। जोन में लगाए गए सभी फुब्बारे बंद होने के साथ मध्य में लगे सबसे बड़े फव्वारा में महीनों से भरे पानी में काई जमा हो चुकी है। वहीं, जोन में लगाई गई आकर्षक स्ट्रीटलाइट जलने की जगह शाम होते ही अंधेरा छा जाता है।
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