स्वच्छ शहरों में गाजियाबाद देश में 18वें नंबर पर, प्रदेश में पाया दूसरा पायदान
गाजियाबाद। स्वच्छ शहरों की सूची में गाजियाबाद ने एक पायदान ऊपर चढ़ा है। देश भर के 4203 शहरों में गाजियाबाद ने स्वच्छता में 18वां स्थान हासिल किया है। वहीं उत्तर प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहा। गारबेज फ्री सिटी की श्रेणी में भी गाजियाबाद वन स्टार शहर से ऊपर चढ़कर थ्री स्टार शहरों की श्रेणी में शामिल हो गया। वहीं इनोवेशन एंड बेस्ट प्रैक्टिस वाले शहरों की श्रेणी में देश भर के शहरों में गाजियाबाद को इकलौता पुरस्कार मिला है।
रविवार को दिल्ली में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने स्वच्छ सर्वेक्षण-2021 के परिणामों को घोषित कर बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरों के नगर निकायों को पुरस्कृत किया। स्वच्छ सर्वेक्षण में इस बार नगर निगम ने बेहतर प्रदर्शन किया। 2020 में हुए स्वच्छ सर्वेक्षण में गाजियाबाद नगर निगम को देश भर में 19वीं रैंक मिली थी, वहीं गारबेज फ्री सिटी की श्रेणी में सिर्फ एक स्टार मिला था। इस साल शुरूआत से ही नगर निगम के अधिकारियों ने स्वच्छता के क्षेत्र में बेहतर काम किया। गारबेज फैक्टरी लगाई, डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए वाहनों की संख्या बढ़ाई। शौचालयों में साफ-सफाई बढ़ाई। इसकी बदौलत नगर निगम की स्वच्छता रैंक में सुधार हुआ। इस साल स्वच्छता रैंक में सुधार हुआ और गाजियाबाद एक पायदान ऊपर खिसककर 18वें स्थान पर पहुंच गया।
लखनऊ के बाद गाजियाबाद प्रदेश में सबसे स्वच्छ
उत्तर प्रदेश के सबसे साफ शहरों में गाजियाबाद को दूसरा स्थान मिला है। लखनऊ के बाद गाजियाबाद प्रदेश का सबसे स्वच्छ शहर रहा। बीते साल गाजियाबाद प्रदेश में तीसरे स्थान पर था। प्रदेश की रैंकिंग में भी इस बार सुधार हुआ है।
दो पुरस्कार मिले
गाजियाबाद नगर निगम को इस बार दो पुरस्कार मिले हैं। 10 से 40 लाख की आबादी वाले शहरों में गाजियाबाद को ‘बेस्ट बिग सिटी इन इनोवेशन एंड बेस्ट प्रैक्टिस’ की श्रेणी में देश का इकलौता पुरस्कार मिला। इसके अलावा गार्बेज फ्री सिटी में 3 स्टार रेटिंग के लिए पुरस्कार दिया गया। महापौर आशा शर्मा, नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर, अपर नगरायुक्त प्रमोद कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार और पूर्व एसबीएम प्रभारी अरुण कुमार मिश्रा ने यह पुरस्कार ग्रहण किए।
वेस्ट प्लास्टिक के इस्तेमाल और डस्ट फ्री अभियान ने दिया इनाम
नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने नगर निगम में कई नए प्रयोग किए। उन्होंने कचरे में आने वाली वेस्ट प्लास्टिक से खूबसूरत तस्वीरें, टाइल्स, ट्री गार्ड, शहरों में संदेश देते बोर्ड और विशाल कंप्यूटर की-बोर्ड बनाकर उन्हें शहर में सजाया। डस्ट फ्री शहर बनाने के लिए पोटली अभियान चलाया। इसके अलावा शहर के तालाबों को स्वच्छ बनाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया। नालों का बायोरेमेडिएशन कराया। इन सभी पहल ने ही नगर निगम को इनोवेशन एंड बेस्ट प्रैक्टिस का इनाम दिलाया।
सर्वेक्षण के बाद शहर फिर हुआ गंदा
स्वच्छ सर्वेक्षण मार्च 2021 में पूरा हो गया था। तब तक शहर को गारबेज फ्री बना लिया गया था, लेकिन डंपिंग ग्राउंड को लेकर हुए विवाद के बाद शहर की सड़कों पर फिर कचरा फैल गया। कॉलोनियों और मुख्य बाजारों की सड़कों पर कूडे़ के ढेर लगे नजर आए। नगर निगम को गारबेज फ्री सिटी का तमगा तो मिल गया, लेकिन हकीकत में शहर अभी भी गारबेज फ्री नहीं हो पाया। अब स्वच्छ सर्वेक्षण-2022 की तैयारी शुरू हो गई है, लेकिन निगम अधिकारियों ने जल्द ही डंपिंग ग्राउंड का इंतजाम नहीं किया तो निगम को मिला यह तमगा छिन भी सकता है।