मानसिक रोगी को किसी भी अधिकार से महरूम नहीं कर सकते
कार्यशाला में अपर जिला जज ने कहा, संपत्ति पर भी उनका अधिकार सामान्य व्यक्ति की तरह
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। मानसिक रोगियों के अधिकार सामान्य लोगों की तरह ही है। मानसिक रोग की वजह से उन्हें किसी भी अधिकार या सुविधा से महरूम नहीं किया जा सकता है। यहां तक कि संपत्ति पर भी उनका अधिकार सामान्य व्यक्ति के बराबर ही है। अगर उन्हें उनके अधिकार से वंचित किया जाता है तो वे जिला विधिक प्राधिकरण से मदद ले सकते हैं.... कानूनी अधिकारों की ये जानकारी अपर जिला जज रामचंद्र यादव ने दी।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर रविवार को जिला एमएमजी अस्पताल में कराई गई कार्यशाला में मुख्य अतिथि के तौर पर उन्होंने कहा कि किसी भी मानसिक रोगी को किसी भी तरह की सजा नहीं दी जा सकती है। इसी मुद्दे पर विशिष्ठ अतिथि विशेष न्यायधीश ( सीबीआई) राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कहा, मानसिक बीमारी वास्तव में मानसिक रोग पूरी तरह से साध्य है। समस्या तब बढ़ती है जब बीमारी को छिपाया जाता है।
मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्त्रस्म के नोडल अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने जिला मानसिक स्वास्थ्य प्रकोष्ठ में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी दी। साइकेट्रिस्ट कंसलटेंट डॉ. साकेतनाथ तिवारी और डॉ. अनिल विश्वकर्मा ने मानसिक रोगों के लक्षणों के बारे में जानकारी दी। आयोजन में जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अनुराग भार्गव, एसीएमओ डॉ. विश्राम सिंह, डॉ. डीएम सक्सेना, संयुक्त जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. संजय तेवतिया, डॉ. आशुतोष गौतम मौजूद रहे। संचालन जिला मलेरिया अधिकारी जीके मिश्रा ने किया।
कार्यशाला में राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने मरीजों के तीमारदारों के सवालों के जवाब भी दिए।
सवाल
मेरे भतीजे ने आत्महत्या की थी। पुलिस को इसके साक्ष्य दिए। मेरा बड़ा भाई कई बार आत्महत्या का प्रयास कर चुका है। पुलिस को साक्ष्य दिए, लेकिन पुलिस ने इन्हें खारिज कर फाइल बंद कर दी। मुझे कानूनी मदद कैसे मिलेगी?
जवाब
आप विधिक सेवा प्राधिकरण में सोमवार को चले जाइएगा। अपनी पूरी बात रखिए, जो साक्ष्य पुलिस के सामने रखे, वे दिखाइए। आपकी निश्चित रूप से मदद की जाएगी।
सवाल
बड़े भाई 58 साल के हो चुके हैं, उन्होंने शादी नहीं की। अब पूरे दिन इधर-उधर घूमते रहते हैं। किसी का कहना नहीं मानते हैं, ऐसे में मैं क्या करूं?
जवाब
आपके भाई को कानूनी मदद की नहीं, इलाज की जरूरत है। आप उन्हें किसी मानसिक रोग विशेषज्ञ वाले अस्पताल में भर्ती कराइए और अच्छे से इलाज कराइए। वह ठीक हो सकते हैं।
80 फीसदी देरी से कराते हैं उपचार
सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार ने कहा कि करीब 80 फीसदी मानसिक बीमार शुरु में मनोचिकित्सक के पास जाने से बचते हैं। जब केस बिगड़ जाता है, तब लोग डॉक्टर के पास आते हैं। लोगों को चाहिए कि रोगी के साथ प्यार से पेश आएं और समय से इलाज कराएं। झाड़फूंक के चक्कर में न पड़ें।
सरकारी खर्च पर मिलती है कानूनी मदद
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रभारी सचिव कमल सिंह ने बताया कि मानसिक रोगी अपने उपचार के संबंध में गोपनीयता का अधिकार रखता है। इसके साथ ही उसे और उसके परिजनों को उपचार के संबंध में पूरी जानकारी प्राप्त करने का भी अधिकार है। मानसिक रोगी को निशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने का अधिकार है। जरूरत होने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उसे सरकारी खर्च पर कानूनी मदद प्रदान करता है।