रिश्तेदार बनकर छह महीने में 35 लोगों को ठगा
बुलंदशहर। ‘हैलो.. पहचाना मुझे, हां-हां मैं आपका वही दूर का रिश्तेदार बोल रहा हूं। यार मुझे तुम्हारे अकाउंट में कुछ रुपये डलवाने हैं। जब रकम खाते में आ जाए तो मुझे मिलकर दे देना।’ जिले के 35 लोगोें के पास ऐसी ही कॉल आईं तो उन्होंने जैसे ही नंबर दिया उनका खाता खाली हो गया।आए दिन आ रहे ऐसे मामले पुलिस के लिए भी चिंता का विषय बन चुके हैं।
साइबर एक्सपर्ट की मानें तो फिशिंग कॉल साइबर अपराध का बीते कुछ वर्षों में इजाद किया गया ठगी का नया तरीका है। शातिर अपराधी किसी भी अनजान नंबर पर कॉल कर पीड़ित को अपना रिश्तेदार बताता है। साथ ही इसके बाद वह आरोपी पीड़ित व्यक्ति को अपनी बातों में पूरी तरह से प्रभावित कर उसके फोन पे या गूगल पे में रुपये भेजने की बात कहता है। साथ ही जल्द ही मिलकर उक्त रकम को पीड़ित से कैश में लेने की बात कही जाती है। इसके तहत शातिर आरोपी उक्त पीड़ित के खाते में पांच या दस रुपये ट्रांसफर कर देता है। जिससे कि पीड़ित को रुपये आने का भरोसा हो जाता है। इसके बाद आरोपी ओटीपी या फिर लिंक भेजकर पीड़ित को फंसाता है। लिंक ओपन करते ही या आरोपी को ओटीपी बताते ही पीड़ित के खाते से रकम ठग ली जाती है।
चोला थाना क्षेत्र के गांव खानपुर निवासी संदीप सिंह पुत्र वीर सिंह मंगलवार को पुलिस लाइन स्थित साइबर सेल के कार्यालय पहुंचे। जहां उन्होंने तहरीर देकर बताया कि 27 अगस्त को उनके फोन पर एक अनजान नंबर से कॉल आई थी। आरोपी ने खुद को पीड़ित का रिश्ते में दूर का जीजा बताया था। इसके बाद आरोपी ने पीड़ित को अपने झांसे में लिया और रुपये उसके खाते में डलवाने की गुहार लगाई। पीड़ित आरोपी की बातों में तब आया जब आरोपी ने उसके खाते में पांच रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद आरोपी ने एक-एक कर तीन बार पीड़ित को लिंक भेजे और पीड़ित द्वारा लिंक ओपन करते ही उसके खाते से प्रत्येक बार में 15-15 हजार कर तीन बार में कुल 45 हजार रुपये ठग लिए गए। पीड़ित ने अब कार्रवाई की गुहार लगाई है।
रहें सतर्क, साझा न करें डिटेल
फिशिंग कॉल के जरिए लोगों को साइबर ठग अपना शिकार बना रहे हैं। इससे बचने के लिए जागरूकता की जरूरत है। लोगों को अंजान कॉल पर अपने किसी भी अकाउंट की जानकारी या ओटीपी आदि नहीं बतानी चाहिए। - कमलेश बहादुर, एसपी क्राइम